मनोज जरांगे पाटील का बड़ा ऐलान, मांगें पूरी होने तक पानी भी नहीं पियेंगे
मराठा आरक्षण की मांग कर रहे मनोज जरांगे के अनशन का आज दसवां दिन है. जरांगे ने कहा है कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती तो वो 12 सितंबर को बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे.

मराठा समाज को आरक्षण दिलाने की मांग करते हुए मनोज जरांगे पाटिल ने लगातार 10 वें दिन हड़ताल पर हैं. उन्होंने कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो वो 12 सितंबर को मुंबई कूच करेंगे.
उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार उन्हें दिए गए आश्वासनों को पूरा करने में विफल रही है. इसके विरोध में उन्होंने पानी या चिकित्सा उपचार लेने से इनकार करते हुए आंदोलन को और तेज कर दिया है.
लगातार 10 वें दिन आंदोलन जारी
दरअसल, मराठा आरक्षण आंदोलन एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है. कोटा की मांग कर रहे कार्यकर्ता मनोज जारांगे ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के आठवें दिन पानी और सलाइन लेना बंद कर दिया और मेडिकल इलाज कराने से भी इनकार कर दिया और आज उनके आंदोलन का 10वां दिन है.
उन्होंने कहा कि वो अपनी सभी मांगों को लागू किए जाने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे. इस घटनाक्रम ने सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत को एक तरह से फिर से शुरू कर दिया है.
कुछ दिन पहले ही जारांगे ने मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल के इस आश्वासन पर पानी और सलाइन लेने पर सहमति जताई थी कि कुछ मुख्य मांगों पर दो दिनों के भीतर कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, कोई प्रगति न होते देख उन्होंने पानी पीने से भी मना कर दिया है.
जरांगे कब से अनशन पर?
बता दें कि मनोज जरांगे 29 अगस्त 2026 से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. आज 7 सितंबर (सोमवार) को उनके आंदोलन का 10वां दिन है. जरांगे ने शनिवार (5 सितंबर) से ही पानी पीने और किसी भी तरह का मेडिकल उपचार लेने से मना कर दिया है. जरांगे की तबियत लगातार बिगड़ रही है लेकिन वो अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और 12 सितंबर को मुंबई में बड़े पैमाने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है.
जरांगे की क्या हैं मुख्य मांगे?
जरांगे की मुख्य मांगों में रिटायर्ड जस्टिस शिंदे कमेटी को मिले 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर सभी को तुरंत कुनबी सर्टिफिकेट बांटना शामिल है. इसके अलावा मराठा छात्रों के संगठन सारथी (SARATHI) के लिए फंड जारी करने, हैदराबाद गजेटियर लागू करने, मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज अपराध को वापस लेने और मराठा और कुनबी' नाम से एक अलग मंत्रालय बनाए जाने की मांगे भी शामिल हैं.






















