केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शिवसेना (UBT) में आई फूट पर बयान देते हुए कहा कि उनका मानना है कि पार्टी के 6 सांसद इसलिए अलग हुए क्योंकि वे उद्धव ठाकरे के साथ नहीं रहना चाहते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने महायुति छोड़कर महा विकास अघाड़ी का साथ देकर बड़ी गलती की और कांग्रेस-एनसीपी के साथ गठबंधन करना बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के खिलाफ फैसला लेना था. ऐसा भी कहा जा रहा है कि इसी वजह से शिवसेना और शिवसैनिक उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ रहे हैं. 

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'अगर उद्धव ठाकरे NDA में शामिल होते, तो ऐसी स्थिति नहीं आती'

रामदास अठावले ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे 2019 में ही NDA के साथ महायुति में बने रहते, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं ने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल का जानबूझकर विरोध कर महिलाओं के साथ अन्याय किया और NDA को धोखा किया. उन्होंने कहा कि अब संसद के मॉनसून सत्र होगा, जिसमें सरकार बहुमत के साथ इस बिल को पारित करा सकती है, जिससे महिलाओं को न्याय मिलेगा. 

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शरद पवार NDA में शामिल होकर अजित पवार का सपना करे पूरा

इसके अलावा उन्होंने कहा कि आज अजीत पवार उनके बीच नहीं हैं और जब नगर निगम तथा जिला पंचायत चुनाव हुए थे, तब वे शरद पवार के साथ थे. अठावले ने बताया कि पूरी NCP के एक साथ आने और दोनों गुटों के NDA को समर्थन देने की बात चल रही थी, लेकिन अजीत पवार के निधन के कारण ऐसा नहीं हो सका. अठावले ने अपनी राय देते हुए कहा कि शरद पवार को राष्ट्रीय स्तर पर NDA में शामिल हो जाना चाहिए, क्योंकि इससे अजीत पवार का सपना पूरा हो सकेगा और वैसे भी एक समय में सभी NDA का हिस्सा थे.

उन्होंने यह भी कहा कि देश के विकास के लिए कुछ वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर शरद पवार को नरेंद्र मोदी के विकास एजेंडे का समर्थन करना चाहिए. साथ ही उन्होंने शरद पवार से NDA का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि यह देश और उनकी पार्टी, दोनों के हित में होगा.

'संजय राउत का अपशब्दों का इस्तेमाल करना अच्छी बात नहीं'

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के बयान पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतने सारे सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद उनका गुस्सा होना समझा जा सकता है. हालांकि, उनके प्रती अपशब्दों का इस्तेमाल करना अच्छी बात नहीं है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में अपशब्दों का इस्तेमाल करना हमारी परंपरा नहीं है. संजय राउत राज्यसभा के सांसद भी हैं, इसलिए उनका ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना सही नहीं है.

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