महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले विधान परिषद चुनाव को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को बड़ा ऐलान कर दिया. पार्टी ने इस चुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया और सहयोगी दल शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के उम्मीदवार अंबादास दानवे का समर्थन करने की घोषणा की. यह फैसला दोनों दलों के नेताओं के बीच लंबी बातचीत के बाद लिया गया.

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दरअसल, यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एक दिन पहले ही महा विकास आघाड़ी (एमवीए) में दरार के संकेत दिखे थे, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और कांग्रेस दोनों ने 12 मई को होने वाले विधान परिषद चुनाव में विपक्ष के खाते में आने वाली एकमात्र सीट पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी.

उद्धव गुट ने कांग्रेस को मनाया

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि कांग्रेस की राय थी कि शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे को खुद विधान परिषद चुनाव लड़ना चाहिए, लेकिन जब ठाकरे की पार्टी ने अंबादास दानवे को उम्मीदवार बनाया, तो कांग्रेस ने भी चुनाव लड़ने का फैसला किया था. हालांकि, उद्धव गुट के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सपकाल से मुलाकात कर कांग्रेस को मनाने की कोशिश की.

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बीजेपी के खिलाफ एक होकर लड़ेंगे- कांग्रेस

हर्षवर्धन सपकाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हमारा मानना था कि दानवे की उम्मीदवारी पर चर्चा की जरूरत है. अब हम उद्धव जी के फैसले का समर्थन करेंगे और इसे एमवीए का साझा रुख मानेंगे. आने वाले दिनों में हम एमवीए के रूप में बीजेपी के खिलाफ लड़ेंगे."

'एकजुट होकर लड़ेगा विपक्षी गठबंधन'

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद यह तय हुआ कि विपक्षी गठबंधन आगामी चुनाव एकजुट होकर लड़ेगा. बता दें कि राज्य विधानमंडल के उच्च सदन के नौ सदस्य 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिनमें शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे भी शामिल हैं.

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