महाराष्ट्र सरकार ने जन्म प्रमाणपत्रों में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है. महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) क्षेत्र में 'सुधार' या 'स्पेलिंग करेक्शन' के नाम पर जारी किए गए 19,734 जन्म प्रमाणपत्रों को रद्द करने का आदेश जारी किया है. इस मुद्दे को बीजेपी नेता और महाराष्ट्र SIR प्रमुख किरिट सोमैया काफी समय से उठा रहे थे.
इसको लेकर राज्य सरकार को कई आंकड़े और दस्तावेज सौंपे भी थे. अब जाकर प्रशासन ने इसपर एक्शन लिया है. सरकार का कहना है कि इन प्रमाणपत्रों की वैधता और प्रक्रिया की जांच के बाद यह फैसला लिया गया है. स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, पुणे ने मुंबई डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार को एक पत्र भेजकर यह कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
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किन सर्टिफिकेट्स को कैंसिल करने के आदेश
पत्र में बर्थ एंड डेथ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1969, महाराष्ट्र बर्थ एंड डेथ रजिस्ट्रेशन नियम, 2000 और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन प्रमाणपत्रों में गैर-कानूनी तरीके से सुधार किया गया है. सरकारी पत्र के मुताबिक, बर्थ रिकॉर्ड को बदलने या ठीक करने के लिए एक खास प्रक्रिया की आवश्यकता होती है. हालांकि, यह देखा गया है कि मुंबई महानगरपालिका ने बड़े पैमाने पर जन्म प्रमाणपत्रों में बदलाव किए हैं, और उनकी जांच करके संबंधित सर्टिफिकेट्स को कैंसिल करने का प्रोसेस शुरू करने के आदेश दिए गए हैं.
जन्म प्रमाणपत्र के मूल रिकॉर्ड बहाल किया जाएगा बहाल
इस मामले में, ओरिजिनल जन्म रिकॉर्ड को बनाए रखते हुए गैर-कानूनी तरीके से किए गए सुधारों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं. आदेश में यह भी कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार, आगे की कार्रवाई करनी चाहिए. महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में वर्ष 2024 से 2026 के बीच जन्म प्रमाणपत्रों में किए गए 19,734 संशोधनों (बदलावों) को रद्द करने का आदेश दिया है. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जन्म प्रमाणपत्र रद्द नहीं किए जाएंगे, बल्कि उनमें नियमों के विपरीत किए गए बदलावों को हटाकर मूल रिकॉर्ड बहाल किया जाएगा.
स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय, पुणे द्वारा जारी निर्देश में मुंबई के जिला रजिस्ट्रार और संबंधित अधिकारियों को इन मामलों की जांच कर मूल जन्म रिकॉर्ड को बहाल करने के आदेश दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 और महाराष्ट्र जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियम, 2000 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना बड़ी संख्या में संशोधन किए गए थे.
प्रमाणपत्र में क्या गड़बड़ियां पाई गईं?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 19,734 मामलों में से 16,528 मामलों में किसी प्रकार के सहायक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जबकि 3,206 मामलों में दस्तावेज अधूरे पाए गए. इसी वजह से इन संशोधनों को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई है. यह मामला बीजेपी नेता और महाराष्ट्र एसआईआर प्रमुख किरिट सोमैया द्वारा उठाए जाने के बाद चर्चा में आया था.
सोमैया ने आरोप लगाया था कि कुछ जन्म प्रमाणपत्र ऐसे अस्पतालों के नाम पर जारी किए गए, जिनका अस्तित्व ही नहीं है. उन्होंने यह भी दावा किया था कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग कर अवैध रूप से पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल किए जा सकते हैं.
SIT करेगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई में फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों से जुड़े कुछ मामलों की जांच अपराध शाखा की विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपी गई है. बीएमसी के दो पूर्व स्वास्थ्य अधिकारियों पर बिना उचित सत्यापन के कुछ जन्म पंजीकरणों को मंजूरी देने के आरोप भी लगाए गए हैं. सरकार ने संबंधित अधिकारियों को सभी मामलों की जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने और रिपोर्ट पुणे स्थित उप मुख्य रजिस्ट्रार को सौंपने के निर्देश दिए हैं.
