महाराष्ट्र में ISIS-अल-कायदा समेत 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर बैन, सरकार का बड़ा एक्शन
Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने ISIS, अल-कायदा समेत आतंकी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर बैन लगा दिया है. यह कार्रवाई BNSS, 2023 की धारा 98(1) के तहत की गई है.

महाराष्ट्र सरकार ने आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. राज्य के गृह विभाग ने 6 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी करते हुए आतंकी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों, पत्रिकाओं, पुस्तकों, दस्तावेजों और डिजिटल प्रचार सामग्री को जब्त (Forfeit) करने का आदेश दिया है. यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 98(1) के तहत की गई है.
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मुंबई एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) की खुफिया रिपोर्ट, साइबर सर्विलांस और विभिन्न जांचों में यह सामने आया कि कई प्रतिबंधित और आतंकी संगठनों से जुड़ी प्रचार सामग्री अब भी डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड चैनलों और अन्य माध्यमों से प्रसारित की जा रही है.
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प्रकाशनों में हिंसक उग्रवाद और जिहाद का महिमामंडन
इन प्रकाशनों में हिंसक उग्रवाद और जिहाद का महिमामंडन किया गया है. साथ ही युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने, वैचारिक रूप से प्रभावित करने, आतंकी संगठनों में भर्ती के लिए प्रेरित करने और भारत की संप्रभुता, अखंडता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली सामग्री प्रकाशित की गई है.
अधिसूचना में कहा गया है कि ATS के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च 2026 को राज्य सरकार को भेजे गए पत्र में ऐसे समाचार पत्रों, पुस्तकों, दस्तावेजों, चित्रों, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अन्य दृश्य सामग्री को जब्त करने की सिफारिश की थी.
जांच में पाया गया कि इनका संबंध भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ गतिविधियों से है तथा इनसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय अपराध बनते हैं.
सरकार ने आदेश में क्या कहा?
राज्य सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि इन प्रकाशनों का प्रकाशन, वितरण, बिक्री, प्रदर्शन, संग्रहण, कब्जा या डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराना सार्वजनिक व्यवस्था, राज्य की सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा है.
सरकार का मानना है कि इस प्रकार की सामग्री विशेष रूप से युवाओं के कट्टरपंथीकरण का माध्यम बन रही है. इसलिए इन सभी प्रकाशनों और उनकी भौतिक तथा डिजिटल प्रतियों को तत्काल प्रभाव से सरकार के पक्ष में जब्त घोषित किया गया है.
सरकार ने इन प्रकाशनों पर लगाया बैन
सरकार द्वारा प्रतिबंधित सूची में सबसे अधिक 'Voice of Khurasan' मैगजीन के विभिन्न अंक शामिल हैं, जिन्हें अल-अजाइम मीडिया द्वारा प्रकाशित किया गया है और जिनका संबंध इस्लामिक स्टेट (ISIS), इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (ISKP) तथा उससे जुड़े संगठनों से बताया गया है.
इसके अलावा 'The Revolutionary Resurgence', 'Kashmir Kifah-Resilience & Courage', 'The Soul of Resistance', 'Nawai Gazwa-e-Hind', 'Modern Warfare', 'The School of Yusuf', 'Tawheed Lectures', 'Hijra', 'How Can We Be Content With Abandoning Jihad', 'The Mujahideen Poisons Handbook', 'Explosives – Basics', 'Petrol Bomb Manual' और अन्य कई कट्टरपंथी साहित्य को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है.
प्रकाशनों का आतंकी संगठनों से संबंध
सरकार के अनुसार, इन प्रकाशनों का संबंध ISIS/ISKP, हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (Pir Panjal Regiment), अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की पहली अनुसूची में शामिल अन्य आतंकी संगठनों और उनसे जुड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, वेबसाइट, सोशल मीडिया चैनलों तथा एन्क्रिप्टेड नेटवर्क से है.
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य राज्य में कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार पर रोक लगाना, युवाओं को आतंकी संगठनों के प्रभाव से बचाना तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है. अधिसूचना के अनुसार, प्रतिबंधित सूची में शामिल सभी 114 प्रकाशनों की किसी भी प्रकार की भौतिक या डिजिटल प्रति अब जब्त मानी जाएगी और उनके प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.
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