गाजियाबाद ISI जासूसी मॉड्यूल के तार महाराष्ट्र से जुड़ने के बाद राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है. हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह खुलासा हुआ कि इस जासूसी मॉड्यूल ने महाराष्ट्र के कम से कम पांच बेहद संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा में सेंध लगाई थी. 

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हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते इन स्थानों को चिन्हित कर वहां की सुरक्षा व्यवस्था को 'सैनेटाइज' कर दिया है, लेकिन इस घटना ने राज्य प्रशासन के बीच हड़कंप मचा दिया है. सूत्रों ने बताया कि इस सुरक्षा चूक पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य भर में लगे सीसीटीवी कैमरों की समीक्षा के आदेश दिए हैं.

चीनी कंपनियों के CCTV सिस्टम खरीद पर लगेगी रोक

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब महाराष्ट्र सरकार चीनी कंपनियों से जुड़े सीसीटीवी सिस्टम की खरीद पर पूरी तरह रोक लगाएगी. फडणवीस ने एहतियात के तौर पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विशेष रूप से संवेदनशील ठिकानों पर लगे कैमरों की जांच करें और जहां भी सुरक्षा का खतरा नजर आए, वहां चीनी उपकरणों को हटाकर नए सिस्टम लगाए जाएं.

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जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इस जासूसी मॉड्यूल का एक आरोपी उरण (न्हावा शेवा पोर्ट के पास) में वेश बदलकर दिहाड़ी मजदूर के रूप में रह रहा था. इसके अलावा, सूत्रों का यह भी दावा है कि गिरोह के सदस्यों ने मुंबई में नौसेना के ठिकानों और हवाई अड्डे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की भी रेकी की थी. यह मॉड्यूल सौर ऊर्जा और सिम कार्ड से चलने वाले स्टैंडअलोन कैमरों का उपयोग कर रहा था, जिनके जरिए पाकिस्तान में बैठे संदिग्ध हैंडलर्स को गुप्त रूप से लाइव वीडियो फीड और जीपीएस लोकेशन भेजी जा रही थी.

महाराष्ट्र का गृहविभाग तैयार कर रहा नई सीसीटीवी पॉलिसी

इस खतरे से निपटने के लिए राज्य का गृह विभाग अब एक नई CCTV Policy तैयार कर रहा है. इस नई पॉलिसी के तहत अब बीएमसी और एमएमआरडीए जैसी किसी भी सरकारी एजेंसी को सीसीटीवी लगाने के लिए पुलिस की एनओसी (NOC) लेना अनिवार्य होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि इस्तेमाल किया जा रहा हार्डवेयर सुरक्षित है और उसमें डेटा लीक की कोई गुंजाइश नहीं है.

सरकार की योजना अब निजी सुरक्षा तंत्र को भी मुख्य सुरक्षा ग्रिड से जोड़ने की है. नई पॉलिसी के तहत निजी हाउसिंग सोसायटियों के लिए यह अनिवार्य किया जा सकता है कि वे अपने परिसरों के बाहर लगे कैमरों की लाइव फीड पुलिस के साथ साझा करें. इस कदम का उद्देश्य न केवल संवेदनशील डेटा को सुरक्षित करना है, बल्कि शहर की निगरानी प्रणाली को इतना मजबूत बनाना है कि भविष्य में विदेशी घुसपैठ या डेटा ट्रांसफर की किसी भी कोशिश को तुरंत नाकाम किया जा सके.