महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने ऑनलाइन बैठक लेकर पार्टी संगठन की गहन समीक्षा की. इस बैठक में उन्होंने पदाधिकारियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी 'काम नहीं तो पद भी नहीं.' उन्होंने कहा कि मंत्री, विधायक, सांसद जैसी पदों को किनारे रखकर सभी को कार्यकर्ताओं की तरह काम करना होगा. पार्टी के विस्तार के लिए हर किसी को मैदान में उतरकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी.

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हर पदाधिकारी से व्यक्तिगत सवाल

एकनाथ शिंदे ने हर संपर्क प्रमुख से सीधे सवाल पूछकर उनके काम का हिसाब मांगा. अब तक कितने BLA नियुक्त किए, कितनी बार क्षेत्र का दौरा किया, कितनी बैठकें लीं. इन सभी बातों की विस्तृत जानकारी ली गई. जिनकी कामगिरी संतोषजनक नहीं पाई गई, उनके खिलाफ कार्रवाई का संकेत भी दिया गया.

'काम नहीं तो सीधा हटाया जाएगा'

पदाधिकारियों के लिए नियमित काम की रिपोर्ट देना अनिवार्य किया गया है. अगर काम की अपडेट नहीं दी गई, तो सीधे पद से हटाने की चेतावनी दी गई. साथ ही, हर बैठक की फोटो और पूरी जानकारी रोज जमा करने के निर्देश भी दिए गए.

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चुनाव रणनीति: हर मतदाता पर ध्यान

संभावित निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्गठन को ध्यान में रखते हुए हर मतदाता सूची पर काम करने के निर्देश दिए गए. हर मतदाता सूची पर दो BLA नियुक्त करने और उनके साथ नियमित बैठक करने को कहा गया.फिलहाल कोई चुनाव न होने के कारण शिवसेना  का पूरा फोकस संगठन को मजबूत करने पर है. शिंदे ने निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के सभी 43,000 गांवों में पार्टी की मौजूदगी दिखनी चाहिए.

पुणे में पूरी कार्यकारिणी भंग

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, शिंदे बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी में हैं. जो काम करेंगे वही पद पर रहेंगे, और जो निष्क्रिय हैं उन्हें हटाया जाएगा. इसी के तहत पुणे में पार्टी की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी गई है, जिससे राज्य के अन्य पदाधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है. अब शिंदे खुद सभी पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के काम की समीक्षा करेंगे. साथ ही, यह संकेत भी दिया गया है कि जो पार्टी के लिए काम करेगा, वही भविष्य में बड़े पदों तक पहुंचेगा.