Maharashtra Politics: महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है कि भक्त प्रहलाद की जैसी भक्ति थी, वैसी ही भक्ति कांग्रेस जनों के आचरण, विचार और वाणी में दिखाई देती है. जब हम बार-बार कांग्रेस की बात करते हैं, तो दूसरी ओर रावण की तरह पीड़ा देने वाली सोच वाला पक्ष दल बदलने की बात करता है और कहता है कि केवल वही सही है. जैसे भक्त प्रहलाद की भक्ति से भगवान नरसिंह का अवतार हुआ, वैसे ही ईवीएम या बैलेट पेपर के माध्यम से नरसिंह रूप अवतार आएगा और राक्षस रूपी बीजेपी के अन्याय को समाप्त किए बिना नहीं रहेगा.
 
हर्षवर्धन सपकाल ने ये बातें सामाजिक सौहार्द और सद्भाव बढ़ाने के उद्देश्य से उनके नेतृत्व में परभणी में निकाली गई सद्भावना पदयात्रा में कही. इस पदयात्रा में विधान परिषद में कांग्रेस के गुटनेता आ. सतेज उर्फ बंटी पाटील, पूर्व मंत्री नितीन राऊत, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव कुणाल चौधरी, सांसद डॉ. कल्याण काळे, सांसद रवींद्र चव्हाण समेत कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे.

सुबह पोखर्णी में नरसिंह के दर्शन के साथ सद्भावना पदयात्रा की शुरुआत हुई. इस अवसर पर बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आगे कहा कि राज्य में सामाजिक तनाव पैदा किया जा रहा है. परभणी में भी हाल ही में हुई एक घटना के जरिए सामाजिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश की गई. राज्य में सामाजिक तनाव को कम करने और सद्भाव व भाईचारा बढ़ाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने यह सद्भावना पदयात्रा आयोजित की है. इससे पहले बीड जिले में मस्साजोग से बीड, नागपुर और नासिक में भी सद्भावना पदयात्रा निकाली गई थी. उससे पहले पर्ली में सद्भावना सत्याग्रह किया गया और फिर परभणी में यह यात्रा आयोजित की गई.

'ठेकेदारों की जेब भरने का काम है जारी'इस अवसर पर बोलते हुए विधान परिषद में कांग्रेस के गुटनेता सतेज उर्फ बंटी पाटील ने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग राजनीतिक लाभ के लिए सामाजिक वातावरण को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं, तब कांग्रेस पार्टी हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में सद्भाव और सौहार्द बढ़ाने का प्रयास कर रही है. जनता को लूटकर उद्योगपतियों और ठेकेदारों की जेब भरने का काम जारी है. ठेकेदारों के हित में शक्ति पीठ महामार्ग के बहाने किसानों की उपजाऊ जमीन हड़पने की सरकारी साजिश है, लेकिन कांग्रेस इसे सफल नहीं होने देगी.

सद्भावना यात्रा के सुबह के सत्र में 8 किलोमीटर और दोपहर के सत्र में 8 किलोमीटर की पदयात्रा हुई. शाम को माहेर मंगल कार्यालय में विश्राम किया जाएगा.

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