महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बीजेपी पर बड़ा और सीधा हमला बोला है. एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अजित पवार ने कहा कि बीजेपी ने पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका में जमकर पैसे लूटे है और खुलेआम लूट मचाई गई. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी हफ्ताखोरी करती है, मेरे पास सारे सबूत है. उन्होंने अपने बयान से सीधे तोर पर बीजेपी पर निशाना साधा है.

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राज्य सरकार में भले ही महायुति के तहत अजित पवार, बीजेपी और एकनाथ शिंदे साथ मिलकर सरकार चला रहे हों. लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग दिखाई दे रही है. खासकर महानगरपालिका चुनावों को लेकर सहयोगी दलों के बीच टकराव खुलकर सामने आने लगा है.

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जिन्होंने आरोप लगाए थे आज वहीं मेरे साथ हैं- अजित पवार

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मेरे ऊपर भी 70,000 करोड़ रुपये के आरोप लगे थे. जिन लोगों ने मेरे ऊपर वे आरोप लगाए थे, क्या वे सब आज मेरे साथ हैं या नहीं? पवार ने इसे राजनीति का दोहरा चरित्र बताया और कहा कि सत्ता और स्वार्थ के लिए सिद्धांतों को बार-बार बदला जा रहा है.

बीजेपी की राजनीतिक नैतिकता पर पवार ने खड़े किए सवाल

अजीत पवार ने कहा कि अगर उन पर लगाए गए आरोप सही थे, तो फिर आज वही लोग उनके साथ क्यों खड़े हैं. अजित पवार ने इसे बीजेपी की राजनीतिक नैतिकता पर सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी से डरने वाले नहीं हैं और जो भी सच है, उसे सामने लाते रहेंगे.

पवार के बयान ने छेड़ा नया राजनीतिक विवाद

पवार के इस बयान को आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका को लेकर आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में और तेज हो सकते हैं. अजित पवार के इस बयान से राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और बीजेपी की ओर से अब इस पर जवाब का इंतजार किया जा रहा है.

शरद पवार के साथ मंच साझा करते ही अजित के बदलते दिखे तेवर

पुणे जिले की पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका इसका बड़ा उदाहरण बनती जा रही है. यहां अजित पवार अपने चाचा शरद पवार के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरते नजर आ रहे हैं. शरद पवार के साथ मंच साझा करते ही अजित पवार के तेवर भी बदले-बदले दिख रहे हैं. उनके बयान और भाषा एक बार फिर पुराने वाले आक्रामक अजित पवार की याद दिला रहे हैं.

अजित के आरोपों को क्या नजर अंदाज करेगी बीजेपी

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या गठबंधन की राजनीति में बीजेपी ऐसे आरोपों को नजरअंदाज कर देगी? क्या बीजेपी यह मानकर चुप रहेगी कि यह सिर्फ स्थानीय निकाय चुनाव तक सीमित बयानबाजी है, या फिर इसका असर राज्य की सियासत पर भी पड़ेगा. अब देखना होगा कि पिंपरी-चिंचवड़ के इस सियासी घमासान को बीजेपी कितनी गंभीरता से लेती है और क्या यह टकराव आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा देता है या नहीं.

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