महाराष्ट्र: लातूर पिटाई मामले पर सियासत गर्म, उद्धव गुट बोला- 'टोपी पहनकर सफर करना...'
Maharashtra News: लातूर पिटाई मामले पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने सरकार को घेरा. बोले, धर्म के नाम पर बढ़ती हिंसा से लोग असुरक्षित हैं. निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की.

महाराष्ट्र के लातूर से जुड़े कथित पिटाई मामले को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि देश में ऐसा माहौल बनता जा रहा है, जहां धर्म और जाति के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.
दुबे ने एक पुराने गीत की पंक्तियां याद दिलाते हुए कहा, “न तू हिंदू बनेगा, न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और महायुति की सरकार के दौर में समाज में नफरत की आग बढ़ती जा रही है, जो बुझने का नाम नहीं ले रही.
'टोपी पहनकर सफर करना भी खतरे से खाली नहीं'
आनंद दुबे ने कहा कि अगर महाराष्ट्र से, खासकर लातूर से कोई व्यक्ति टोपी पहनकर ट्रेन में सफर कर रहा है और उसे पीटा जाता है, तो यह बेहद गंभीर बात है ऐसे सफर करना खतरे से खाली नहीं है.. उनके मुताबिक, “न महाराष्ट्र सुरक्षित है, न महाराष्ट्र के बाहर लोग सुरक्षित हैं. न हिंदू सुरक्षित है, न मुसलमान सुरक्षित है.”
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है, तो फिर धर्म के नाम पर लोगों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? दुबे ने कहा कि अगर लोग एक-दूसरे को पकड़-पकड़ कर मारेंगे-पीटेंगे, तो यह देश और समाज किस दिशा में जाएगा?
भाजपा नेताओं पर भी साधा निशाना
दुबे ने भाजपा के कुछ नेताओं के बयानों को भी विवाद की जड़ बताया. उन्होंने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा और गिरिराज सिंह जैसे नेताओं के बयान समाज में और ज्यादा विभाजन पैदा करते हैं. उनके मुताबिक, इतनी नफरत उगली जा रही है कि माहौल पूरी तरह दूषित हो गया है.
सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग
आनंद दुबे ने मांग की कि लातूर से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि सरकार को अपने अहंकार से बाहर निकलकर कानून-व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, ताकि आम लोगों में भरोसा बना रहे.
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है. इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है.
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Source: IOCL

























