मुंबई पुलिस ने अपराध जांच में एक बार फिर अपनी तत्परता साबित करते हुए एक 'ब्लाइंड मर्डर' (अंधे कत्ल) की गुत्थी को महज 12 घंटों के भीतर सुलझा लिया है. सांताक्रूज पुलिस ने जुहू चौपाटी के पास एक प्लास्टिक की बोरी में मिले सड़े-गले शव के मामले में न केवल मृतक की पहचान की, बल्कि हत्या के आरोपी को भी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. गिरफ्तार आरोपी एक गारमेंट व्यवसायी है.

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इलाके में सनसनी घटना का खुलासा 9 फरवरी 2026 को हुआ, जब सांताक्रूज पुलिस थाने के पुलिसकर्मी अशोक लक्ष्मण गोजरे (46 वर्ष) क्षेत्र में गश्त पर थे. जुहू चौपाटी के लैंडिंग पॉइंट पर जेटी के पास उन्हें एक संदिग्ध प्लास्टिक की बोरी दिखाई दी. जब बोरी की जांच की गई, तो पुलिस के होश उड़ गए; उसमें एक पुरुष का शव था, जो काफी हद तक सड़ चुका था. 

पूरे इलाके में फैल गई थी सनसनी 

शव की हालत देखकर साफ था कि हत्या कहीं और की गई और सबूत मिटाने के इरादे से लाश को यहां फेंका गया था. इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी. पुलिस ने तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 103(1) (हत्या) और 238 (साक्ष्य मिटाना) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

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तकनीकी जांच से खुला राज 

शव की शिनाख्त करना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि शव की स्थिति खराब थी. लेकिन पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और अपने विश्वसनीय मुखबिरों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया. कड़ी मेहनत के बाद मृतक की पहचान 40 वर्षीय अशोक हरिलाल गौड़, निवासी मुंबई के रूप में हुई. सुरागों की कड़ी जोड़ते हुए पुलिस की टीम आरोपी तक जा पहुंची. पुलिस ने घाटकोपर पश्चिम से वाहिद अली मोहम्मद इसराइल शेख उर्फ 'मिट्टू' (30 वर्ष) को हिरासत में लिया.

जुर्म कबूला

आरोपी मिट्टू, जो मूल रूप से आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है और मुंबई में गारमेंट का काम करता है, ने पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि अशोक गौड़ की हत्या करने के बाद उसने शव को बोरी में भरकर नाले में फेंक दिया था, ताकि कोई उसे पकड़ न सके. साक्ष्य मिलने के बाद 10 फरवरी 2026 को पुलिस ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. इस त्वरित कार्रवाई को मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में सांताक्रूज पुलिस टीम द्वारा अंजाम दिया गया.