नेशनल कॉन्फ्रेंस के चीफ और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जिन्ना साहब (मोहम्मद अली जिन्ना) समझते थे कि कश्मीर तो मुसलमान मुल्क है, हमारे साथ चला जाएगा. जिन्ना को लगता था कि कश्मीर कहीं और नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि आज अगर मुसलमान का खून बह जाए तो कोई परवाह नहीं है लेकिन अगर एक हिंदू का खून बह जाएगा तो कहेंगे ओह ये तो खून है. सारा मुल्क उठकर खड़ा हो जाएगा.
अंग्रेजों का जिक्र कर क्या बोले?
फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा, "उस वक्त अंग्रेजी ने यही किया था. अगर हिंदू बादशाह है और लोग ज्यादा मुसलमान हैं तो वहां लोगों का चलेगा कि वो कहां जाना चाहते हैं. जैसे जूनागढ़ में हुआ. जैसे हैदराबाद में हुआ."
लोगों ने हुकूमत चुनी लेकिन ताकत एलजी के पास- फारूक
नेशनल कॉन्फ्रेंस चीफ ने कहा कि जिन लोगों ने इस वतन के साथ हाथ मिलाया उसका क्या हश्र किया गया? फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "इसका हमें दुख होता है किस वतन के साथ हमने हाथ मिलाया, जिसमें हमारे लिए कोई मोहब्बत ही नहीं है. प्यार ही नहीं, सोच ही नहीं है. आज लोगों ने हुकूमत (जम्मू-कश्मीर में) चुनी है लेकिन ताकत किसके पास है? लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास है."
25 किताबों को बैन करने के फैसले पर क्या बोले पूर्व सीएम?
जम्मू-कश्मीर के 25 किताबों को बैन करने के फैसले पर उन्होंने कहा, "वो कश्मीर की तारीख के बारे में कहते थे. ये भी ये बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं." पूर्व सीएम ने दिल्ली में जिया उस सलाम और आनंद मिश्रा द्वारा सह-लिखित किताब "द लायन ऑफ नौशेरा" के विमोचन समारोह में ये बातें कही.
बता दें कि फारूक अब्दुल्ला की पार्टी केंद्र सरकार पर हमलावर है. नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रही है. गुरुवार (7 अगस्त) को इंडिया गठबंधन की बैठक में भी फारूक अब्दुल्ला ने ये मुद्दा उठाया था.
