केंद्र की मोदी सरकार संसद के आगामी विशेष सत्र में परिसीमन विधयेक 2026 और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधनों को लाने की तैयारी कर रही है. इसमें लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर 850 के करीब जा सकती है. इसको लेकर विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया है. शिवसेना (UBT) नेता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बिल को लेकर कहा कि संसद की अवधि और प्रश्न काल बढ़ाना पड़ेगा, उन्होंने चिंता जताई कि ऐसा न हो जनप्रतिनिधियों की आवाज दब जाए.
विपक्ष इस बिल का इसलिए भी विरोध कर रहा है क्यूंकि आरोप लगाया है कि इस समय पांच राज्यों में चुनाव जारी हैं, ज्यादातर नेता व्यस्त हैं और बिना सर्वदलीय बैठक के सरकार ऐसा करना चाह रही है जोकि गलत है. इसलिए इस पर खासा हंगामा होने के आसार हैं.
प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सीटों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि लोक सभा में सीटों की संख्या बढ़कर 850 तक पहुंच जाती है, तो संसद को प्रत्येक सत्र के लिए कार्य-दिवसों की संख्या बढ़ा देनी चाहिए, ताकि 'शून्य काल' (Zero Hour), 'प्रश्न काल' (Question Hour) और विधायी विधेयकों पर चर्चा के लिए अधिक समय मिल सके. इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि सीटों की इस विशाल संख्या के कारण कहीं जनता के प्रतिनिधियों की आवाज़ ही दबकर न रह जाए.
क्या हो सकता है इसके बाद ?
इस बिल के पास होने से लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित हो जायेगा. साथ ही इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं का कोटा शामिल होगा.
सरकार इसके लिए परिसीमन आयोग का गठन करेगी जिसमें चुनाव क्षेत्रों की नयी सीमा फिर तय होगी. जोकि संविधान के के प्रावधानों के अनुकूल होगी.
फिलहाल इस बिल को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी काफी आक्रामक है और उसका इरादा जाहिर है कि वो इस बिल को इसी सत्र में लाने के लिए पुरजोर कोशिश करेगी.
