महिलाओं के खाते में न भेजी जाए लाडकी बहिन योजना की अगली किस्त! कांग्रेस ने क्यों रख दी ऐसी मांग?
Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र कांग्रेस ने चुनाव आयोग से 'लाडली बहना योजना' की दूसरी किस्त चुनाव तक रोकने की मांग की है, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता है.

महाराष्ट्र कांग्रेस ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि लाडकी बहिण योजना की दूसरी किस्त को लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचने से रोका जाए. कांग्रेस का मानना है कि 14 जनवरी को महिलाओं के अकाउंट में आने वाले ये पैसे किसी न किसी तरह से मतदान पर प्रभाव डाल सकते हैं. यह चिंता महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव संदेश कोंडविलकर ने जताई है. इसके लिए उन्होंने राज्य चुनाव आयोग को पत्र भी लिखा है.
मामले पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने योजना के कार्यान्वयन की देखरेख कर अधिकारियों से जवाब मांगा है. साथ ही, आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार को भी एक पत्र भेजा है.
कांग्रेस नेता ने इसे 'सामूहिक सरकारी रिश्वतखोरी' करार दिया
कांग्रेस नेता ने पत्र में लिखा है, "महाराष्ट्र सरकार ने लाडकी बहन योजना नवंबर 2025 की राशि दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में लाभार्थी के खाते में जमा कर दी है. सरकार ने राज्य में नगरपालिका चुनावों के लिए मतदान से एक दिन पहले दिसंबर 2025 और जनवरी 2026, दो महीनों के लिए संयुक्त रूप से 3000 रुपये उपलब्ध कराने का वादा किया है."
इससे 1 करोड़ से अधिक महिला मतदाता प्रभावित होंगी और चुनाव के दिन वे सत्ताधारी दल के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए प्रोत्साहित होंगी. यह एक प्रकार की सामूहिक सरकारी रिश्वतखोरी है. सरकार की इस कार्रवाई से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा है.
'हम योजना के विरोध में नहीं'- कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, "हम लाजकी बहिन योजना के विरोध में नहीं हैं. हम आयोग से अनुरोध करते हैं कि वह सरकार को निर्देश दे कि लाडकी बहिन योजना के लिए दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की धनराशि चुनाव समाप्त होने के बाद ही जारी की जाए."
जानकारी के लिए बता दें कि महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के लिए 14 जनवरी को मतदान होने वाले हैं. इसके बाद 16 जनवरी को मतगणना के बाद रिजल्ट जारी किए जाएंगे. इस बीच कांग्रेस का मानना है कि अगर ऐसे समय में सरकारी योजना का पैसा लाभार्थियों के खाते में आता है, तो वे सत्तारूढ़ दल को वोट देने के लिए प्रेरित होंगे और यह नैतिक दृष्टि से गलत होगा.
Source: IOCL


























