Mumbai News: चेंबूर हादसे में बड़ा खुलासा, सीसी सड़क और कंक्रीटीकरण के चलते गई मासूम की जान
Mumbai News In Hindi: मुंबई के चेंबूर बस हादसे की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. बीएमसी ने सीसी सड़क और पेड़ों के आसपास कंक्रीटीकरण को 11 साल के विहान की मौत का बड़ा कारण माना है.

मुंबई के चेंबूर में 30 जून को हुए दर्दनाक पेड़ हादसे की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, 11 साल के विहान श्रीवास्तव की मौत का सबसे बड़ा कारण पेड़ की जड़ों के आसपास किया गया कंक्रीटीकरण और सीसी सड़क का निर्माण था. जांच समिति ने साफ कहा है कि जड़ों तक न तो पर्याप्त पानी पहुंच रहा था और न ही मिट्टी से जरूरी पोषण मिल पा रहा था. इसी वजह से करीब 60 से 70 साल पुराना पीपल का पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होता गया और भारी बारिश के दौरान जड़ समेत उखड़कर स्कूल बस पर गिर पड़ा.
इस हादसे के तुरंत बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त अश्विनी भिडे ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया था. समिति में उप आयुक्त (विशेष अभियांत्रिकी) पुरुषोत्तम मालवदे और उप आयुक्त (अभियांत्रिकी) शशांक भोरे को शामिल किया गया. दोनों अधिकारियों को 8 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
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कैसे हुआ था चेंबूर का दर्दनाक हादसा
30 जून की दोपहर करीब ढाई बजे चेंबूर पश्चिम स्थित डायमंड गार्डन के पास यूनिवर्सल हाई स्कूल की बस गुजर रही थी. बस में 13 बच्चे सवार थे. तभी सड़क किनारे खड़ा विशाल पीपल का पेड़ अचानक जड़ समेत उखड़कर बस पर गिर पड़ा. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई.
मुंबई फायर ब्रिगेड, बस स्टाफ और स्थानीय लोगों ने मिलकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया और सभी बच्चों को बस से बाहर निकाला. हादसे में कई बच्चे घायल हुए, जबकि गंभीर रूप से घायल 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
रिपोर्ट में क्या-क्या आया सामने
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पेड़ बाहर से पूरी तरह सामान्य और स्वस्थ दिखाई दे रहा था. यही वजह थी कि सामान्य निरीक्षण में कोई खतरा नजर नहीं आया. लेकिन पेड़ की जड़ों के चारों ओर बड़े पैमाने पर कंक्रीट बिछा दिया गया था.
इससे बारिश का पानी और मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व जड़ों तक नहीं पहुंच पा रहे थे. लंबे समय तक ऐसा होने से जड़ें कमजोर हो गईं. भारी बारिश और तेज हवा का दबाव पड़ने पर पेड़ खुद को संभाल नहीं पाया और जड़ समेत गिर गया.
समिति ने साफ सिफारिश की है कि शहर में किसी भी पेड़ की जड़ों के आसपास कंक्रीटीकरण नहीं किया जाना चाहिए. जहां पहले से कंक्रीट डाला गया है, वहां वैज्ञानिक तरीके से उसे हटाया जाए ताकि जड़ों तक मिट्टी और पानी आसानी से पहुंच सके. इसके अलावा शहरी विकास से जुड़े सभी विभागों को वृक्ष संरक्षण के तय मानकों का सख्ती से पालन करने की सलाह भी दी गई है.
3 अधिकारी निलंबित, ठेकेदार पर भी कार्रवाई की तैयारी
बीएमसी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. इसके साथ ही संबंधित ठेकेदार के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने का फैसला लिया गया है. जांच रिपोर्ट को जल्द ही बीएमसी की विशेष सभा में पेश किया जाएगा, जहां आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा.
बीएमसी के रिकॉर्ड के मुताबिक, जिस पीपल के पेड़ के गिरने से हादसा हुआ उसकी उम्र करीब 60 से 70 साल थी. इस पेड़ को लेकर पहले कभी कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई थी. जनवरी 2026 में सड़क निर्माण के दौरान एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए थे.
इसके बाद 12 मई 2026 को पेड़ का निरीक्षण किया गया था, जिसमें बाहरी जांच के आधार पर उसे स्वस्थ और मजबूत बताया गया था. वहीं, मानसून से पहले 29 मई को उसकी नियमित छंटाई भी कराई गई थी.
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हर साल बढ़ रहे हैं पेड़ गिरने के मामले
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में मानसून से पहले 468 मृत और खतरनाक पेड़ों को हटाया गया, जबकि 1,01,318 पेड़ों की शाखाओं की छंटाई की गई. इसके बावजूद मुंबई में हर साल बड़ी संख्या में पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं. वर्ष 2023 में 687, वर्ष 2024 में 653 और वर्ष 2025 में 855 पेड़ गिरने के मामले दर्ज किए गए थे.
चेंबूर हादसे के बाद बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने शहर के सभी संभावित खतरनाक पेड़ों का दोबारा सर्वे, समयबद्ध निरीक्षण और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके.



















