केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के तत्कालीन निजी सचिव संजीव हंस के खिलाफ रिश्वतखोरी का मामला दर्ज किया है. आरोप है कि उन्होंने मुंबई के एक रियल एस्टेट कारोबारी से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में राहत दिलाने के बदले करीब एक करोड़ रुपये की मांग की और उसे हासिल भी किया.

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सीबीआई की एफआईआर में इस मामले को लेकर कई नाम शामिल किए गए हैं. संजीव हंस के अलावा उनके कथित करीबी विपुल बंसल को भी आरोपी बनाया गया है, जो आरएनए कॉर्पोरेशन नाम की कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है.

इसके साथ ही कंपनी के प्रमोटर अनुभव अग्रवाल और ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स समेत अन्य लोगों को भी इस कथित रिश्वत मामले में नामजद किया गया है. एजेंसी का मानना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक नेटवर्क के जरिए पूरा खेल चल रहा था.

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2019 में हुआ था कथित सौदा

जांच एजेंसी के मुताबिक यह पूरा मामला साल 2019 का है, जब राम विलास पासवान उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री थे. उसी दौरान एनसीडीआरसी में चल रहे एक मामले में राहत दिलाने के नाम पर यह कथित रिश्वत की डील हुई.

सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि पैसे का लेन-देन कैसे हुआ, किस माध्यम से रकम पहुंचाई गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.

आरोपों को बताया गया झूठा

दूसरी ओर, संजीव हंस की तरफ से इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया गया है. उनके वकील चंगेज खान ने कहा है कि यह मामला पूरी तरह झूठा और निराधार है. उनका दावा है कि हंस को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी.

सीबीआई अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या इस मामले में और लोग शामिल हैं और क्या इससे जुड़े और भी मामले सामने आ सकते हैं.