रेलवे सुरक्षा से खिलवाड़! कोलकाता की कंपनी फर्जी सेफ्टी किट करती थी सप्लाई, मामला दर्ज
Railway safety kit Scam: पंजाब मेल के एक कोच में अचानक धुआं दिखाई देने के बाद शुरू हुई जांच ने रेलवे में नकली इलेक्ट्रिकल उपकरण सप्लाई करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है.

- नकली टेस्ट सर्टिफिकेट के साथ बेचे गए थे कोचों में लगने वाले पार्ट.
पंजाब मेल के एक कोच में इस साल मार्च के महीने में फिरोजपुर में अचानक धुआं दिखाई देने के बाद शुरू हुई जांच ने रेलवे में नकली इलेक्ट्रिकल उपकरण सप्लाई करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है. पूरा मामला रेलवे के आधिकारिक टेंडर प्रक्रिया के तहत खरीदे गए फर्जी सुरक्षा उपकरणों से जुड़ा है, जिन्हें सेंट्रल रेलवे की माटुंगा वर्कशॉप में कोचों के भीतर फिट किया गया था.
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने मुंबई के शाहू नगर पुलिस स्टेशन में कोलकाता की सप्लायर कंपनी के खिलाफ आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कराई है, जिस पर नकली मोटर प्रोटेक्शन सर्किट ब्रेकर (MPCB) सप्लाई करने का सीधा आरोप है.
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MPCB क्यों जरूरी?
दरअसल, MPCB रेलवे कोचों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिकल सेफ्टी कंपोनेंट है, जिसका मुख्य काम ओवरलोड या वोल्टेज फ्लक्चुएशन के दौरान बिजली सप्लाई को रोककर कोच को बड़े नुकसान से बचाना होता है. घटना के तुरंत बाद सेंट्रल रेलवे द्वारा गठित तकनीकी जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि इन उपकरणों में खराबी होना सीधे तौर पर ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता था.
कैसे सामने आया मामला?
रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सेंट्रल रेलवे के मटेरियल विभाग ने 8 नवंबर 2025 को इन उपकरणों की खरीद के लिए एक टेंडर जारी किया था, जिसे कोलकाता की इस कंपनी ने एक प्रतिष्ठित निर्माता कंपनी के असली उत्पाद देने का दावा कर हासिल किया था. टेंडर मिलने के बाद 10 दिसंबर 2025 को कंपनी से 325 MPCB का परचेज ऑर्डर जारी हुआ, जिसकी डिलीवरी जनवरी 2026 में मूल निर्माता कंपनी के जाली टेस्ट सर्टिफिकेट के साथ रेलवे को सौंपी गई.
सुरक्षा का यह पूरा फर्जीवाड़ा 7 मार्च 2026 को तब सामने आया जब कोच संख्या 222961 में धुआं देखा गया और शुरुआती जांच में पता चला कि हाई वोल्टेज होने के बावजूद यह MPCB ट्रिप नहीं हुए थे. रेलवे प्रशासन ने केवल सप्लायर के दस्तावेजों पर भरोसा न करते हुए जब खुद इसकी बारीकी से सत्यापन कराया, तो पता चला कि कोलकाता की यह कंपनी मूल निर्माता की अधिकृत डीलर ही नहीं थी और सारे उपकरण नकली थे.
जालसाजी की पुष्टि तब और पक्की हो गई जब 5 मई 2026 को मूल निर्माता कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों ने लिखित रूप से प्रमाणित किया कि सप्लाई किए गए उपकरणों में से कम से कम पांच MPCB पूरी तरह से नकली थे और उनके टेस्ट सर्टिफिकेट भी जाली थे. इस विस्तृत आंतरिक जांच और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर माटुंगा वर्कशॉप के वरिष्ठ सामग्री प्रबंधक की शिकायत पर शाहू नगर पुलिस ने सप्लायर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.


























