BMC चुनाव को लेकर वोटिंग जारी है. इस बीच AIMIM नेता वारिस पठान ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी का नाम काट दिया गया. उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी का भी नाम बूथ पर नहीं मिला. उन्होंने कहा कि जेन-जी वोटर्स में उत्साह था लेकिन बिना वोट डाले कइयों को घर जाना पड़ा. ये तो लोकतंत्र की हत्या है. उन्होंने सवाल किया कि चुनाव आयोग क्या कर रहा है. क्या इस तरह से चुनाव लड़ाया जाएगा. 2017 के बाद आज आठ सालों बाद मुंबई में महानगरपालिका के चुनाव हो रहे हैं लेकिन युवाओं को खाली हाथ घर पर जाना पड़ रहा है.
चुनाव आयोग ने किया क्या है- वारिस पठान
वारिस पठान ने कहा, "ये पूरे महाराष्ट्र सरकार का फेलियर है. चुनाव आयोग का फेलियर है. मैं तो हर बूथ पर जा रहा हूं, हंगामे की स्थिति है. जो इतने सालों से वोट डाल रहे हैं, उनका वहां पर नाम नहीं है. कितनी जगहों पर महिला वोटर्स परेशान हैं. यहां से वहां भगाया जा रहा है. चुनाव आयोग ने यहां पर किया क्या है?"
मैंने अपना वोट डाला- वारिस पठान
AIMIM नेता ने कहा कि इन सब की वजह से वोटिंग प्रतिशत भी कम होता है. उन्होंने कहा, "मैं ये समझता हूं कि चुनाव आयोग को इसका जवाब देना चाहिए कि कहां पर गलती हुई. लोगों के पास जो संवैधानिक अधिकार था वोट डालने का, वही नहीं दिया गया. मैंने तो अपना वोट डाला लेकिन कितने ऐसे लोग थे जो बिना अपना वोट डाले घर चले गए."
वारिस पठान ने कहा कि कभी कहा जा रहा है कि नए बूथ पर जाओ. वहां जाने पर कहा जाता है कि पुराने बूथ पर जाओ. दोनों ही जगह पर लोगों को नाम नहीं मिले. उन्होंने कहा, "मेरे सामने एक पढ़ा लिखा आदमी बिना वोट डाले चला गया." वोटिंग के बाद ऊंगली पर लगने वाली स्याही मिटने के उद्धव ठाकरे के आरोपों पर उन्होंने कहा, "अगर विपक्ष आरोप लगा रहा है तो इस पर सोचना चाहिए."
