मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में ठाकरे भाइयों ने इस बार सीधा मैदान संभालने का फैसला किया है. राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का पूरा फोकस शाखाओं के दौरों और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधी बातचीत पर रहेगा. प्लान के मुताबिक राज ठाकरे हर दिन उन वार्डों में शाखा विजिट करेंगे जहां एमएनएस की संगठनात्मक ताकत मानी जाती है. मकसद साफ है स्थानीय एक्टिविस्ट, ऑफिस बेयरर और उम्मीदवारों को मजबूत करना.

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पहली बार ऐसा दिख रहा है कि शिवसेना (UBT) और एमएनएस की कुछ शाखाओं में राज और उद्धव ठाकरे की जॉइंट विजिट होगी. दोनों नेता शाखाओं में जाकर कार्यकर्ताओं को गाइड करेंगे और आम मुंबईकरों से सीधे संवाद करेंगे. अगले कुछ दिनों तक दोनों भाई शहर के अलग-अलग इलाकों में लोगों से मिलने-जुलने और स्थानीय मुद्दों को सुनने पर जोर देंगे.

अंतिम चरण में जॉइंट कैंपेन मीटिंग

कैंपेन के आखिरी दौर में ठाकरे भाइयों की जॉइंट कैंपेन मीटिंग प्रस्तावित है. रणनीति यह है कि पहले जमीनी नेटवर्क को सक्रिय किया जाए और अंत में साझा मंच से ताकत का प्रदर्शन हो. इसी कड़ी में 6 तारीख को जॉइंट इंटरव्यू के जरिए राज्यभर के कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाने की योजना है.

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युवा चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी

कैंपेन में युवा नेतृत्व को भी आगे रखा गया है. आदित्य ठाकरे ने अमित ठाकरे को खास जिम्मेदारी सौंपी है. दोनों की संयुक्त बैठकें मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में होंगी, ताकि युवाओं और पहली बार वोट करने वालों तक पहुंच बनाई जा सके.

मराठी वोटर्स को एकजुट रखने के लिए कोंकण बेल्ट पर फोकस बढ़ाया गया है. मुंबई में रहने वाले कोंकण मूल के मतदाताओं से जुड़ने के लिए भास्कर जाधव और विनायक राउत को जिम्मेदारी दी गई है. ये नेता मीटिंग और कॉर्नर मीटिंग के जरिए मराठी माणूस और अस्मिता के मुद्दे को धार देंगे.

‘ब्रांड ठाकरे’ की अग्निपरीक्षा

इस बीएमसी चुनाव को सीधे-सीधे ‘ब्रांड ठाकरे’ की साख से जोड़ा जा रहा है. चुनाव आयोग की सूची के मुताबिक मुंबई में 87 सीटें ऐसी हैं जहां शिंदे सेना और ठाकरे बंधुओं के बीच सीधी टक्कर है. इनमें 69 सीटों पर शिवसेना (UBT) बनाम शिंदे सेना और 18 सीटों पर एमएनएस बनाम शिंदे सेना का मुकाबला है. इसके अलावा 97 सीटों पर शिवसेना (UBT) और बीजेपी आमने-सामने हैं.

हिंदुत्व बनाम मराठी अस्मिता

पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मुंबई में शिंदे सेना के मुकाबले शिवसेना (UBT) का प्रदर्शन बेहतर रहा था. अब ठाकरे भाइयों के साथ आने से विपक्ष की ताकत और बढ़ी है. इसी को काउंटर करने के लिए शिंदे सेना और बीजेपी ने हिंदुत्व की पिच पर आक्रामक प्रचार शुरू किया है. जवाब में ठाकरे खेमा मराठी माणूस, स्थानीय मुद्दे और नगर निकाय की बुनियादी समस्याओं को केंद्र में रखकर मैदान मारने की कोशिश कर रहा है.