बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आध्यात्मिक गुरु धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर बाबा) ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर माफी मांगी है और कहा कि उनके खिलाफ साजिश हुई. नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "इस बात से हम मान सकते हैं कि हमारी कुंडली में विवाद मीडिया कॉलम है. खासकर नागपुर में ये जरूर होता है, कि हम जब भी नागपुर आए पता नहीं ऐसा क्या होता है कि हम कुछ भी न बोलें फिर भी कुछ न कुछ हो जाता है."

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उन्होंने कहा, "इस बार हम बोले अच्छे के लिए उनका सम्मान और बढ़े. मैने बताया कि वो कितने संत बाज थे, अद्भुत भक्त थे, लेकिन फिर उसे गलत तरह से पेश कर दिया गया." नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्ध करते-करते थक गए थे और अपना मुकुट समर्थ रामदास स्वामी को सौंपना चाहते थे. इस दौरान मंच पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी बैठे थे. 

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धीरेंद्र शास्त्री ने कहा मेरे बयान को गलत ढंग से पेश किया

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि शिवाजी महाराज के बारे में उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया. कोई मेरा पूरा बयान सुनेगा उसका भवार्थ समझेगा तो हमें नहीं लगता है, तो वो हमें गलत नहीं ठहराएगा क्योंकि हमने कोई भी ऐसी बात नहीं कही है. मैंने उनका सम्मान बढ़ाने के लिए बात कही. फिर भी मैं क्षमा याचना चाहता हूँ. कुछ ताकतें हैं पूरे देश में जो हमारे धर्मांतरण रोकने के प्रयास को रोकना चाहता है. वो कितनी भी कोशिशें कर लें, साजिशें कर लें, इस देश के प्रत्येक हिंदू के साथ हम हैं. 

मैंने कहा- अंध श्रद्धा को बढ़ावा नहीं दिया

उन्होंने अंधविश्वास बढ़ाने का आरोपों पर आगे कहा, "देखिए हमें किसी से साबित करने की आवश्यकता नहीं है. सब अपना काम कर रहे हैं. हमारा दरबार किसी भी अंध श्रद्धा को बढ़ाने के लिए नहीं है. अपितु चमत्कारों के चक्कर में हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए है. श्रद्धा और अंधविश्वास के बीच एक पतली सी रेखा है. जानकर भरोसा करना श्रद्धा है और बिना जाने भरोसा करना अंध श्रद्धा है." उन्होंने आगे कहा कि धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जो लगातार सनातन और संत विरोधी हैं उनका टारगेट हमेशा से ही संतों और महात्माओं को नीचा दिखाना है. कहीं न कहीं इसमें कोई साजिशें हैं. 

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, "हमने ये कभी नहीं कहा कि आप हमारी पूजा करो. हम कभी नहीं कहते कि आप हम पर भरोसा करो. हमारे हर दरबार में हर कथा में एक पंक्ति कहता हूँ कि हमने तुम्हें अपने से जुड़ने के लिए नहीं बुलाया है बल्कि बालाजी हनुमान जी से जुड़ने के लिए बुलाया है. और हमें नहीं लगता कि हनुमान जी की पूजा करना, भक्ति करना अंधविश्वास है. यदि हनुमान जी की भक्ति करना हनुमान चालीसा पढ़ना, हनुमान मंदिर के दर्शन करने की प्रेरणा देना अंधविश्वास है तो इस देश में जितने मजहब हैं वो सब अंधविश्वास है."

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