NCP के पूर्व सांसद आनंद परांजपे का पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा, किस दल में होंगे शामिल?
Anand Paranjpe Resigns: आनंद परांजपे ने सुनेत्रा पवार को लिखी चिट्ठी में कहा कि संगठन में कई जिम्मेदारियां सौंपने के लिए पार्टी का बहुत आभारी हूं, लेकिन इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह करता हूं.

पूर्व सांसद और NCP के महाराष्ट्र प्रवक्ता आनंद परांजपे ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. परांजपे ने एनसीपी के महासचिव, ठाणे और पालघर के को-ऑर्डिनेटर और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी है. एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार को लिखे अपने त्यागपत्र में उन्होंने पार्टी को उन्हें जिम्मेदारियां सौंपने के लिए धन्यवाद दिया. एबीपी माझा के मुताबिक माना जा रहा है कि परांजपे अब शिवसेना में शामिल होंगे.
आनंद परांजपे ने अपने इस्तीफे की चिट्ठी में लिखा, “मैं एनसीपी के महासचिव और महाराष्ट्र प्रदेश के प्रवक्ता, ठाणे और पालघर (जिला) के को-ऑर्डिनेटर और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं. अब तक पार्टी ने मुझ पर भरोसा दिखाया है और मुझे पार्टी संगठन में कई जिम्मेदारियां सौंपी हैं. मैं इसके लिए पार्टी का बहुत आभारी हूं, लेकिन मैं आपसे विनम्रतापूर्वक मेरा इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह करता हूं.”
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आनंद परांजपे हाल में शिंदे से दो बार कर चुके मुलाकात!
कुछ दिन पहले, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे की शरद पवार से मुलाकात पर कई लोगों ने हैरानी जताई थी. इसके बाद, अब एनसीपी के प्रदेश महासचिव आनंद परांजपे ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर अजित पवार गुट की एनसीपी को झटका दिया है. राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा चल रही है कि आनंद परांजपे अब किस पार्टी में शामिल होंगे. ऐसा माना जा रहा है कि वे शिवसेना में शामिल होंगे. पिछले कुछ दिनों में उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से दो बार मुलाकात भी की है.
आनंद परांजपे क्यों चल रहे थे नाराज?
बता दें कि अजित पवार के निधन के बाद, उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभाला है. उन्होंने राज्य के डिप्टी सीएम का पदभार भी ग्रहण कर लिया है. जहां वह अपने पति अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का काम जारी रखे हुए हैं, वहीं एनसीपी में चल रही अलग-अलग आंतरिक सियासत की चर्चा भी हो रही है.
हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में NCP के भीतर मतभेद सामने आए. फाइनल तौर से पार्टी ने जीशान सिद्दीकी को विधान परिषद की सीट दे दी. इसलिए, ऐसी चर्चा थी कि आनंद परांजपे नाराज थे. कहा जा रहा है कि विधान परिषद और राज्यसभा दोनों चुनावों में पार्टी की ओर से नजरअंदाज किए जाने से नाराजगी बढ़ी हुई थी और फिर पार्टी छोड़ने का फैसला लिया.
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