पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने सभी मदरसों का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया है. अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के तहत, सभी जिला अधिकारियों को 5 जुलाई तक अपने क्षेत्रों के मदरसों की विस्तृत रिपोर्ट सचिवालय को सौंपनी होगी. बंगाल सरकार के इस फैसले से अब मुस्लिम नेता नाराज हैं और महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज हो गई है. 

Continues below advertisement

महाराष्ट्र AIMIM के नेता वारिस पठान बंगाल सरकार के इस फैसले पर भड़क गए हैं. उन्होंने कहा, "जबसे बीजेपी की सरकार आई है, बीते 12-13 साल से इनका एक ही काम है. जहां भी जाएं इन्हें मुसलमानों से नफरत है. हमारे खाने पीने से नफरत, हमारे पहनने ओढ़ने से नफरत है. बुर्के से, हिजाब से, मस्जिद-मदरसे से, हर चीज से बस इनको नफरत ही नफरत है. आप देखिए यूपी में कितने मदरसों पर इन्होंने एक्शन लिया है. अब बंगाल के अंदर मदरसों के पीछे पड़ गए हैं."

NDA की बैठक के चलते NCP ने लिया यह बड़ा फैसला, बदली स्थापना दिवस समारोह की तारीख

Continues below advertisement

'मदरसों से पढ़कर निकले नामी लोग'- वारिस पठान

वारिस पठान ने कहा, "मदरसों से अच्छे अच्छे और बड़े बड़े लोग पढ़कर निकले हैं. कभी उनकी भी तो बात करिए न. आप मदरसों का सर्वे करिए, लेकिन साथ-साथ में मंदिरों का सर्वे क्यों नहीं करते? शिशु मंदिरों का भी सर्वेक्षण करिए न, वहां गड़बड़ घोटाले नहीं होते क्या? संविधान तो बराबरी की बात करता है. कायदे कानून तो सब पर बराबर लागू होने चाहिए."

'RSS का भी सर्वे होना चाहिए'- वारिस पठान

वारिस पठान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सर्वे कराने की भी बात कही है. उन्होंने कहा, "अरे RSS ऑर्गेनाइजेशन है, उसका रजिस्ट्रेशन है क्या? पूछिए इनसे? अगर आप सर्वे कर रहे हैं तो सबका ही करिए न. केवल मुसलमानों के खिलाफ ही काम क्यों करना है? मुसलमानों के ही मदरसों को बदनाम करना है? यह ध्यान भटकाने के लिए यह बीजेपी की तकनीक बन गई है."

महाराष्ट्र में मानसून की दस्तक, घने बादलों ने डाला डेरा, सतारा-पुणे समेत 25 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट