दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट पर शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने समिट के उद्देश्यों, शामिल वैश्विक नेताओं और गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े AI रोबोट विवाद पर अपनी स्पष्ट राय रखी. उन्होंने कहा कि AI इम्पैक्ट समिट देश के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है.

इसका उद्देश्य युवाओं के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे तकनीक के जरिए मानवीय विफलताओं को दूर किया जा सके और नई संभावनाएं बनाई जा सकें. उन्होंने कहा कि यह समिट केवल एक कीनोट इवेंट बनकर नहीं रहनी चाहिए. इसे नीतिगत कार्रवाई में बदलना होगा, ताकि भारत जिन तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनका समाधान निकाला जा सके और दीर्घकालिक प्रभाव दिखाई दे.

गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI रोबोट विवाद पर बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी

गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद पर प्रियंका चतुर्वेदी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि वो शर्मनाक था और ये होने से पहले एक बार ये जांच कर लेनी चाहिए थी कि वो क्या प्रेजेंट करेंगे तो ये टाला जा सकता था.

उन्होंने आईएएनएस को दिए बयान में कहा, "जिस तरह से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को इतना बड़ा पवेलियन दिया गया, और उस पवेलियन के जरिए उन्होंने इनोवेशन की बात करके देश में कन्फ्यूजन पैदा किया. ये टाला जा सकता था, अगर आप हर पवेलियन को पहले क्यूरेट करते कि क्या प्रदर्शित होगा, उनकी क्या काबिलियत है. भीड़ का संभालने में भी दिक्कत आ रही है."

रोजगार, रीस्किलिंग और नीति पर जोर

सांसद ने कहा कि युवाओं के रिस्किलिंग, अपग्रेडेशन और नए रोजगार अवसरों का सृजन इस समिट का अहम हिस्सा होना चाहिए. देशभर में उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहन देना और तकनीक आधारित अवसरों का विस्तार करना जरूरी है. पीटीआई के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दिन समिट का उद्घाटन किया और वैश्विक नेताओं की भागीदारी से इसका महत्व बढ़ा है. साथ ही शीर्ष उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए, लेकिन यह प्रक्रिया निरंतर होनी चाहिए.