India-Pakistan Ceasefire: भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि 'अगर अमेरिका के बोलने पर पाकिस्तान से जंग रोकनी ही थी तो पहले ही उसकी मध्यस्थता से बात क्यों नहीं की गई? जब टॉक और टेरर एक साथ नहीं चलेगा, तो आर-पार क्यों नहीं किया गया?'
अबू आजमी ने कहा कि अमेरिका का व्यापार को लेकर दबाव बनाना हमारे देश की जनता का अपमान है. उन्होंने कहा, "क्या मध्यस्ता करके आतंकवाद के खिलाफ जंग रोकने वाला अमेरिका पकिस्तान से गारंटी दिला सकता है कि वह भविष्य में भारत के खिलाफ आतंकवाद नहीं करेगा? वहीं चीन हमारे साथ ट्रेड भी कर रहा है, हमारी जमीन भी हड़पकर बैठा है, भारत के खिलाफ पाकिस्तान के आतंकवाद का साथ भी दे रहा है, इस पर भी सरकार को निर्णय लेना चाहिए."
अबू आजमी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पहले एक बड़ी घटना हुई थी, जिसमें हमारे 40 जवान शहीद हुए थे, फिर भी बातचीत नहीं हुई. इतना बड़ा नुकसान हुआ और हमारे रिश्ते पाकिस्तान से सामान्य बने रहे. प्रधानमंत्री मोदी खुद बिना बुलाए पाकिस्तान चले गए. अब फिर एक गंभीर आतंकी घटना हो गई है. अगर बातचीत करनी थी, तो पहले क्यों नहीं बातचीत शुरू की गई?
ऑपरेशन सिंदुर में अमेरिकी हस्तक्षेप पर उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका तय करेगा कि भारत को कब युद्ध करना है, कब बातचीत, तो हमारी संप्रभुता कहां रही? राम मनोहर लोहिया कहते थे कि भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका सब मिलकर एक महासंघ बनाएं, ताकि अमेरिका जैसी ताकतें हमारी नीति पर असर न डाल सके.
आज अमेरिका दबाव बना रहा है- अबू आजमी
केंद्र की विदेश नीति पर जुबानी हमला करते हुए आजमी ने कहा कि इंदिरा गांधी के दौर में पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए थे, क्योंकि तब की नीति मजबूत थी. आज हालात अलग हैं, आज अमेरिका दबाव बना रहा है. क्या यह स्वतंत्र भारत है?
मुस्लिमों को धर्म के नाम पर किया जा रहा टारगेट- अबू आजमी
साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को देश में नफरत के आतंक पर भी रोक लगाना चाहिए. देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ माहौल बनता जा रहा है. हर दिन मुस्लिमों को धर्म के नाम पर टारगेट किया जा रहा है. कोई धमकी देता है कि जय सियाराम नहीं बोला तो पाकिस्तान भेज दूंगा. ऐसे वीडियो खुलेआम बन रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अगर किसी मुस्लिम मोहल्ले में लोग अपनी छत पर नमाज पढ़ें तो उन पर केस दर्ज किया जा रहा है, पासपोर्ट और लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं. जब सरकार खुद ऐसा कर रही है तो फिर लोगों को खुली छूट मिल रही है. आजमी ने कहा कि देश की जमीन चीन के कब्जे में है, लेकिन सरकार चुप है. महंगाई चरम पर है, बेरोजगारी हर घर में पहुंच चुकी है. लेकिन, चर्चा सिर्फ 'सर्जिकल स्ट्राइक' और 'एयरबेस दौरे' की हो रही है. देश की संपत्ति बेची जा रही है.
आजमी ने आगे कहा कि अगर देश में एक ही तरह के लोग हर वक्त टारगेट पर होंगे, अगर देश की नीतियां अमेरिका तय करेगा, अगर आतंकी घटनाओं के बाद भी सिर्फ चुप्पी होगी, तो जनता सवाल पूछेगी. आज विपक्ष की यही मांग है कि सरकार स्पष्ट रणनीति बनाए, और विदेश नीति को मजबूती से लागू करे, न कि दबाव में झुके.