तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों, विधायकों द्वारा पार्टी के खिलाफ बगावत किए जाने की आलोचना करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने शुक्रवार को कहा, "डरपोक और कृतघ्न" नेता पार्टी छोड़ रहे हैं." ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र में 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बगावत के बाद विभाजित हो गई थी. 

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आदित्य ठाकरे ने तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं को 'डरपोक' बताते हुए कहा कि वे पार्टी द्वारा उनके लिए किए गए कार्यों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं. ठाकरे ने कहा, "जो नेता डरपोक और कृतघ्न हैं, और जिन्हें पार्टी, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा उनके लिए किए गए कार्यों की कोई परवाह नहीं है, वे पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं."

विधानसभा चुनाव में हार के बाद संकट में घिरी टीएमसी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के कई विधायकों के बागी होने के बाद तृणमूल कांग्रेस संकट में घिर गई है. यह उथल-पुथल बाद में संसद तक भी पहुंच गई. बागी सांसदों का दावा है कि उन्हें 20 से अधिक लोकसभा सदस्यों का समर्थन प्राप्त है. राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बारिक ने गुरुवार (11 जून) को पार्टी और उच्च सदन दोनों से इस्तीफा दे दिया और ऐसा करने वाले वह तृणमूल कांग्रेस के तीसरे सांसद बन गए, उनसे पहले सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव ने इस्तीफा दिया था. 

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इस संकट ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को भी उजागर किया है. वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह पार्टी में तभी बने रहेंगे जब अभिषेक को नेतृत्व के सभी पदों से हटा दिया जाएगा.

पार्टी में बगावत तेज होने के बीच कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के प्रति अपना समर्थन दोहराया. सौगत रॉय, शत्रुघ्न सिन्हा और प्रतिमा मंडल जैसे लोकसभा सदस्यों और राज्यसभा सदस्य बाबुल सुप्रियो ने बागी गुट का हिस्सा होने से इनकार किया और कहा है कि वे पार्टी के साथ बने रहेंगे.

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