तहव्वुर राणा के भारत लाए जाने के बीच मुंबई हमले के दोषी आतंकी अजमल कसाब की भी चर्चा हो रही है. पाकिस्तान से आए दस आतंकियों में से अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था. इसे 2012 में फांसी दी गई थी. मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान बचकर भागने में कई लोगों की मदद करने वाले चाय विक्रेता छोटू चाय वाला ने कहा कि तहव्वुर राणा को बिरयानी या अलग कोठरी जैसी कोई विशेष सुविधा नहीं दी जानी.

'बिरयानी की मांग की बात महज एक मिथक'

सवाल है कि क्या अजमल कसाब को खाने में बिरयानी दी जाती थी? इस मामले में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने 2015 में कहा था कि कसाब द्वारा जेल में मटन बिरयानी की मांग करने की बात महज एक मिथक है और आतंकवादी के पक्ष में पैदा की जा रही भावनात्मक लहर को रोकने के लिए ऐसा कहा गया था. 

'सरकार ने उसे कभी बिरयानी नहीं परोसी'

उज्जवल निकम ने कहा था, 'कसाब ने कभी बिरयानी की मांग नहीं की और सरकार ने उसे कभी बिरयानी नहीं परोसी. मैंने यह कहानी सिर्फ उस भावनात्मक माहौल को खत्म करने के लिए गढ़ी थी जो मामले की सुनवाई के दौरान कसाब के पक्ष में बन रहा था.'

छोटू चाय वाला' के नाम से मशहूर मोहम्मद तौफ़ीक़ ने आतंकवादियों से निपटने के लिए देश में सख्त कानून बनाने की भी मांग की. तौफ़ीक़ की दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर  चाय की दुकान थी, जो नवंबर 2008 में आतंकवादियों के हमले की चपेट में आ गई थी. उन्होंने बताया कि हमले के दौरान उन्होंने अपनी आंखों के सामने लोगों को मरते हुए देखा था.

तौफ़ीक़ के अनुसार, इसके बाद उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को सचेत किया, उन्हें हमले से बचने के लिए स्टेशन पर सुरक्षित दिशा की ओर जाने का निर्देश दिया तथा कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया. 

तौफ़ीक़ ने कहा, 'तहव्वुर राणा को अलग कोठरी या बिरयानी और अन्य सुविधाएं देने की कोई जरूरत नहीं है, जैसी (जिंदा पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकवादी) अजमल कसाब को दी गई थीं.'