MP News: भोजशाला में हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूजा-पाठ शुरू, लोगों ने पढ़ी हनुमान चालीसा
MP Dhar Bhojshala temple: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब भोजशाला मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालू यहां पूजा-पाठ कर सकते है. आज सुबह से ही लोग यहां भोजशाला मंदिर में पूजा करने पहुंच रहे हैं.

- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर घोषित किया.
- कोर्ट के फैसले से प्रतिदिन पूजा-अर्चना की अनुमति मिली.
- मंदिर परिसर में अब महिला श्रद्धालु भी कर सकेंगी पूजाय.
- भव्य मंदिर निर्माण और उर्दू लेख वाला पत्थर हटाने की मांग.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया था. इस फैसले के बाद अब यह बात साबित हो चुकी है कि भोजशाला एक मंदिर है और ये मां वाग्देवी का मंदिर है. इसी के साथ भोजशाला की पहचान का एक लंबा संघर्ष भी खत्म हो गया है. इसके साथ ही वो व्यवस्था भी खत्म कर दी गई जिसके तहत केवल मंगलवार को ही यहां पर पूजा की जा सकती थी.
कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रतिदिन श्रद्धालू यहां पूजा-पाठ कर सकते है. कोर्ट के फैसले के अगले दिन यानि की आज सुबह से ही लोग यहां भोजशाला मंदिर में पूजा करने पहुंच रहे हैं. शनिवार सुबह भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों के साथ-साथ श्रद्धालु भी परिसर पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की. इस दौरान सभी ने हनुमान चालीसा का भी पाठ किया, जिसका वीडियो भी सामने आया है.
महिलाओं ने की पूजा
आज मंदिर परिसर में कुछ लोगों और महिलाओं को भी पूजा करते हुए दिखाया है, जो फूल माला चढ़कर वाग्देवी की पूजा करते देखी गईं. महिलाओं से जब मंदिर को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आज ऐसा पहली बार हुआ है जब वो मंगलवार के अलावा किसी अन्य दिन यहां पर अधिकार के साथ पूजा कर सकती हैं. महिला ने बताया कि इसी मंदिर परिसर में उनके भाइयों ने संघर्ष किया यातनाएं झेलीं, लेकिन अब उन्हें कोर्ट ने एक सौगात दी है.
दिग्विजय सिंह के शासनकाल में मंदिर में प्रवेश हुआ था बंद?
भोजशाला के संघर्ष से शुरुआती दिनों से जुड़े रहे दीपक बीड़कर ने मामले पर जानकारी दी. दीपक बीड़कर ने बताया कि वो 2003 से इस आंदोलन से जुड़े हैं. उन्होंने बताया कि दिग्विजय सिंह के शासन में इस मंदिर परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित हुआ था. 7 अप्रैल 2003 को भोजशाला मुस्लिम और हिंदूओं के लिए खोला गया था, लेकिन हिंदूओं ने अपनी लड़ाई जारी रखी और इस तरह आज जीत मिली है. इसके बाद उन्होंने मंदिर के चिन्हों और खंभो सहित सबूतों को दिखाया कि कैसे ये साबित करते हैं कि ये हिंदू मंदिर है.
इस दौरान भोजशाला संघर्ष से जुड़े रहे हिंदू महासभा के अशोक जैन ने भी मंदिर के लिए किए गए संघर्ष के बारे में बताया और उन चिन्हों के बारे में भी बताया जो यहां पर बने हुए हैं और बताया कैसे इन्हें मिटाने की कोशिश भी की गई. उन्होंने मुस्लिम पक्ष के उसे चिन्ह के बारे में भी बताया कि कैसे उसे अलग से रखा गया और फिर यह दावा किया गया कि यहां पहले मस्जिद थी. उन्होंने कहा कि अब जबकि फैसला आ चुका है यहां भव्य मंदिर बनेगा और इस पत्थर जिसमें उर्दू में कुछ लिखा हुआ है उसे हटाया जाएगा.


























