Satna News: शख्स ने जीते जी किया खुद का किया पिंडदान, 13वीं का भी आयोजन, सामने आई ये बड़ी वजह
Satna News In Hindi: सतना जिले के उचेहरा क्षेत्र से सामने आया है, यहां अतरबेदिया निवासी 70 वर्षीय रामलोटन कुशवाहा ने जीते जी खुद का पिंडदान कर आज तेरहवीं का आयोजन किया.

मध्य प्रदेश को यूं ही अजब-गजब नहीं कहा जाता है, सतना जिले से आई इस खबर ने इस बात को चरितार्थ किया है. मामला जिले के उचेहरा क्षेत्र से सामने आया है, यहां अतरबेदिया निवासी 70 वर्षीय रामलोटन कुशवाहा ने जीते जी खुद का पिंडदान कर आज तेरहवीं का आयोजन किया.
अतरबेदिया के रहने वाले रामलोटन कुशवाहा ने तेरहवीं से पूर्व प्रयागराज में अपना पिंडदान वगैरह का कर्म किया था. इसके बाद रामलोटन ने बाकायदा शोक संदेश कार्ड छपवाकर रिश्तेदारों और गांव के लोगों को आमंत्रित किया. जीवित व्यक्ति के तेरहवीं कार्यक्रम में रिश्तेदारों के साथ-साथ ग्रामीण भी बड़ी संख्या में शामिल हुए. फिलहाल यह खबर पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है.
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रामलोटन ने देहदान का भरा था फार्म
दरअसल, इस अनोखे आयोजन करने के पीछे एक भावनात्मक और सामाजिक कारण जुड़ा हुआ है. कुछ समय पहले रामलोटन कुशवाहा ने शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना में देहदान संकल्प लेकर फॉर्म भरे थे. यह बात जैसे ही उनके गांव और रिश्तेदारों तक पहुंची, लोगों ने तरह-तरह की बातें बनानी शुरू कर दीं.
रामलोटन ने क्योंकि अपनी जीते जी तेरहवीं?
बताया गया कि कई लोगों ने ताना मारते हुए कहा कि रामलोटन ने तेरहवीं का खर्च बचाने के लिए देहदान का फैसला लिया है. लगातार मिल रहे तानों से आहत रामलोटन ने समाज को अलग अंदाज में जवाब देने का फैसला किया. उन्होंने तय किया कि जब लोग उनकी तेरहवीं को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो वे अपने जीते जी ही तेरहवीं का आयोजन 13 मई को कर डाला.
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी कर चुके हैं सराहना
रामलोटन कुशवाहा पद्मश्री बाबूलाल दाहिया के निर्देशन में औषधि पौधों और जड़ी-बूटियों के संरक्षण का कार्य कर रहे है. अपने छोटे से परिसर में उन्होंने लौकी समेत कई विलुप्त होती वनस्पतियों को संरक्षित कर एक अनूठी मिसाल पेश की है. उनके कार्यों की सराहना देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' में कर चुके हैं.
जैव विविधता संरक्षण के लिए किया जा चुका है पुरस्कृत
इसके अलावा उन्हें जैव विविधता संरक्षण के लिए राज्यस्तरीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. जड़ी बूटियों और दुर्लभ प्रजाति के पौधों को संरक्षित करने के कारण ही रामलोटन कुशवाहा को साल 2024 में जैव विविधता प्रोत्साहन का प्रथम श्रेणी का पुरस्कार मिल चुका है.
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