'डॉक्टर-इंजीनियर बनाए, अब हमारी नौकरी पर संकट', MP में 1.5 लाख शिक्षकों का 18 को महाआंदोलन
MP News In Hindi: मध्य प्रदेश में डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से खतरा मंडरा रहा है, जिसके तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दी गई है.

मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था इस वक्त एक बड़े चौराहे पर खड़ी है. प्रदेश के करीब डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों की रातों की नींद उड़ गई है और उनकी नौकरी पर तलवार लटक रही है.
इसकी वजह है— सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य करना. बरसों से स्कूलों में बच्चों को अक्षर ज्ञान देने और उनका भविष्य संवारने वाले 'गुरुजी' आज खुद अपनी नौकरी बचाने के लिए परीक्षा के डर के साए में जी रहे हैं.
जनगणना ड्यूटी के बीच लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे शिक्षक
पूरे प्रदेश में इस फैसले को लेकर आक्रोश और हताशा है. शिक्षक सड़कों पर उतरकर मंत्री और कलेक्टरों को ज्ञापन सौंप रहे हैं. भोपाल के जहांगीराबाद स्थित प्रदेश के पहले सीएम राइज स्कूल (अब सांदीपनी विद्यालय) से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो हैरान करने वाली हैं. यहां के शिक्षक जनगणना ड्यूटी और स्कूल के कामकाज के बीच समय निकालकर खुद लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे हैं.
करीब 20 वर्षों से शिक्षा दे रहे शिक्षकों का दर्द छलक उठा है. उनका कहना है, "हमने 20 सालों में बच्चों को पढ़ाकर डॉक्टर और इंजीनियर बनाया, लेकिन अब सरकार को हमारी ही पढ़ाई और काबलियत पर भरोसा नहीं है. हम डिप्रेशन में हैं, सरकार को हमारा साथ देना चाहिए."
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को तुरंत प्रभाव से खत्म किया जाए. वरिष्ठता और 20 सालों के अनुभव के आधार पर शिक्षकों के पद सुरक्षित रखे जाएं. राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का मजबूती के साथ पक्ष रखे.
सरकार का रुख
इस भारी संकट के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार का फैसला नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का आदेश है, जिसका पालन करना सरकार की मजबूरी है.
मंत्री ने कहा, "सड़कों पर धरना-प्रदर्शन करने से कुछ हासिल नहीं होगा. अगर शिक्षकों को राहत चाहिए तो उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का ही रुख करना चाहिए. कोर्ट ने एक संगठन की अपील स्वीकार कर नोटिस जारी किए हैं, अन्य को भी वहीं जाना चाहिए." हालांकि, मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार विधि विभाग से परामर्श लेकर पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने के विकल्पों पर काम कर रही है.
18 अप्रैल को आर-पार की लड़ाई
अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के इन शिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. आगामी 18 अप्रैल को राजधानी भोपाल में एक बड़ा आंदोलन करते हुए 'मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा' निकालने की तैयारी है. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन 'गुरुजी' की गुहार सुनते हैं या फिर नियमों की फाइलें डेढ़ लाख परिवारों का भविष्य तय करेंगी.
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Source: IOCL




























