बुंदेलखंड: अखाड़ा गुरु भगवानदास रायकवार 'दाऊ' का निधन, बेटे ने शस्त्र प्रदर्शन के साथ दी विदाई
MP News In Hindi: बुंदेलखंड की शान और प्राचीन शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले गुरु भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ जी का शनिवार की रात एम्स भोपाल में निधन हो गया.

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की गौरवशाली परंपरा और प्राचीन शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को वैश्विक पहचान दिलाने वाले पद्मश्री (2026) के लिए चयनित अखाड़ा गुरु भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ जी का शनिवार 18 अप्रैल की रात को निधन हो गया. आज रविवार (19 अप्रैल) को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ.
पुलिस विभाग द्वारा दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
भगवानदास रायकवार की उनके निवास से अंतिम यात्रा शुरू हुई, जिसमें अखाड़ा दल चल रहे थे. इस यात्रा में ढोल बाजों को बजाते हुए ले जाया गया. नरयावली नाका स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के पूर्व अखाड़ा दल ने शस्त्र प्रदर्शन कर अंतिम विदाई दी. इसमें उनके बेटे राजकुमार रायकवार ने लाठी का प्रदर्शन भी किया.
सागर कलेक्टर मति प्रतिभा पाल के निर्देश पर एसडीएम अमन मिश्रा, तहसीलदार संदीप तिवारी के द्वारा मुविक्तिधाम पहुंचकर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई एवं तिरंगा झंडा अर्पित किया गया. पुलिस विभाग के द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुख व्यक्त कर प्रार्थना की
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने पद्मश्री भगवान दास रायकवार की निधन पर श्रद्धांजलि अर्पितकर दुख व्यक्त किया और परिवार को दुख सहन करने की भगवान से प्रार्थना की. कलेक्टर मती प्रतिभा पाल ने भी श्रद्धांजलि देते हुए दुख व्यक्त किया और अपने संदेश में कहा कि सागर ही नहीं संपूर्ण बुंदेलखंड एवं प्रदेश के लिए यह बहुत बड़ी क्षति है.
पद्मश्री से चयनित भगवान दास रैकवार की अंतिम यात्रा में विधायक प्रदीप लारिया जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी , कांग्रेस अध्यक्ष भूपेंद्र मोहासा, महेश जाटव , नगर निगम कमिश्नर राजकुमार खत्री एसडीएम अमन मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि जिला एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में जन समुदाय मौजूद था.
भोपाल एम्स मे हुआ निधन
पद्मश्री भगवान दास रैकवार का भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली. वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे और वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहे थे. परिजनों के अनुसार, दाऊ जी को पहले सागर के चैतन्य हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां 17 मार्च से उनका इलाज चल रहा था. हालत में सुधार न होने पर 7 अप्रैल को उन्हें बेहतर उपचार के लिए AIIMS भोपाल रेफर किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.
‘दाऊ’ जी के साथ अखाड़ा परंपरा का एक युग समाप्त
83 साल के भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ जी ने अपना पूरा जीवन बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र युद्ध कला ‘अखाड़ा’ के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया. उनके अथक प्रयासों से इस प्राचीन कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली.
उल्लेखनीय है कि साल 2026 के लिए उन्हें ‘पद्मश्री सम्मान’ के लिए चयनित किया गया था. यह सम्मान उन्हें भारतीय पारंपरिक मार्शल आर्ट और अखाड़ा विद्या के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रशिक्षण में उनके अमूल्य योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा था. दाऊ जी के निधन से बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंची है. उनके जाने से अखाड़ा परंपरा का एक युग समाप्त हो गया है.


























