Jabalpur News: शिवराज सरकार पर चिकित्सा शिक्षा और उपचार से जुड़े जबलपुर के बड़े संस्थान को खत्म करने की साजिश करने का आरोप लगा है. प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस विधायक तरुण भनोट इस मामले को लेकर बिफर पड़े है, क्योंकि यह संस्थान उनके विधानसभा क्षेत्र में स्थित है. उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखी चिट्ठी में जबलपुर के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन के विखंडन के षड्यंत्रों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. जबलपुर में छाती एवं सांस से जुड़ी बीमारियों के मुकम्मल उपचार और पढ़ाई के लिए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन विभाग को विकसित किया गया है. यह संस्था भारत की एकमात्र ऐसी संस्था है, जहां पर रेस्पिरेटरी मेडिसिन विषय की 8 एमडी सीट्स के साथ ही नेशनल मेडिकल कमीशन, नई दिल्ली द्वारा अकादमिक सत्र 2023- 24 में डीएम पल्मोनरी मेडिसिन सुपर स्पेशलिटी पाठ्यक्रम की 6 सीटों के संचालन की अनुमति भी प्रदान की गई है. अब इस बहुउपयोगी संस्था पर भी विखंडन का खतरा मंडरा रहा है. सीएम को पत्र लिख कर लगाए आरोपविधायक तरुण भनोट ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि भोपाल में बैठे शीर्ष नौकरशाहों और मेडिकल कॉलेज जबलपुर प्रबंधन के अधिकारी मिलकर षड्यंत्र पूर्वक इस संस्था के विखंडन की योजना पर काम कर रहे हैं. भनोत ने कहा कि स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रगति को लेकर संस्था के संचालक से विस्तृत चर्चा की थी. इसके बाद उनके द्वारा सौंपे गए विजन डॉक्यूमेंट की कॉपी मुख्यमंत्री की सहमति के लिए भोपाल भेजा गया था. विधायक ने कॉलेज प्रबंधन पर लगाए ये आरोपउन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग जबलपुर के मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के साथ मिलकर इस अति महत्वपूर्ण संस्था को खंडित करने का षड्यंत्र कर रहा है, जो जबलपुर के साथ सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है. उन्होंने बताया कि स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन विभाग का स्वरूप अब काफी वृहद हो चुका है. एक तरफ उसके विकास और संवर्धन के लिए बेहतर काम करने लायक बनाने के बजाय उस संस्था को खंडित करने की मंशा कहीं न कहीं शीर्षस्थ अधिकारियों की दुर्भावना के अलावा कुछ नही है. समूचे मध्य भारत के मरीज होंगे लाभान्वितइस बारे में स्कूल आफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ जितेंद्र भार्गव ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि मरीजों और विद्यार्थियों के हित को देखते हुए विभाग से जुड़ी जानकारियां उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है. नेशनल मेडिकल कमीशन और राज्य शासन के आदेशानुसार विभाग का संचालन किया जा रहा है. इस विभाग की  प्रगति और विस्तार के लिए प्रयास किए जा रहे है. आने वाले समय में कई नई इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव है, जिससे समूचे मध्य भारत के मरीज लाभान्वित होंगे.