मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए चिंता का सबब है. इस बड़ी हार के बाद बीजेपी नेतृत्व तुरंत ही एक्शन मोड में आ गया है और अब पार्टी की ओर से बड़ा फैसला लिया गया है.
दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी ने कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और पूर्व संगठन मंत्री अंबाराम कराडा को नई जिम्मेदारी दी गई है. ये दोनों सदस्य चुनाव प्रचार में शामिल सभी मंत्रियों, विधायकों और बीजेपी पदाधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे.
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तय की जाएगी जिम्मेदारी
चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट बीजेपी हाईकमान को सौंपी जाएगी. रिपोर्ट के आधार पर सभी की जिम्मेदारी तय की जाएगी. जिम्मेदारी तय करने के फैसले से कयास लगाए जा रहे हैं कि जिम्मेदार नेताओं पर पार्टी एक्शन भी ले सकती है.
नरोत्तम मिश्रा का बार-बार हो रहा जिक्र
दरअसल, दतिया में हार के कारणों की जब भी चर्चा होती है, बार बार पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सामने आता है. दतिया में नरोत्तम मिश्रा काफी मजबूत नेता माने जाते हैं. वर्षों से उनका इस सीट पर दबदबा रहा है. इस बीच जब उन्हें टिकट न देकर पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ रहे आशुतोष मिश्रा को मैदान में उतारा तो नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में खासा नाराजगी दिखी. नरोत्तम खुद पार्टी के इस फैसले से भावुक हो गए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि उनके समर्थकों की नाराजगी भी बीजेपी की हार का कारण हो सकती है.
नया चेहरा लाने पर बीजेपी को हुआ नुकसान?
दतिया सीट पर उपचुनाव में 6 बार के विधायक नरोत्तम मिश्रा की जगह नए चेहरे को उम्मीदवार बनाने का BJP का फैसला सफल नहीं रहा. कांग्रेस ने यह सीट बरकरार रखी. कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने सोमवार को BJP के आशुतोष तिवारी को 6016 मतों से हराया. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BJP की हार केवल एक विधानसभा सीट का नुकसान नहीं है बल्कि यह मध्य प्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए भी बड़ा झटका है.
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