मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला विवाद मामले को सुनवाई के लिए इंदौर बेंच के पास वापस भेजा
जबलपुर कोर्ट ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़ी याचिकाओं को इंदौर बेंच में स्थानांतरित कर दिया है, क्योंकि विवादित स्थल धार जिले में स्थित है, जो इंदौर पीठ के अधिकार क्षेत्र में आता है.

मध्य प्रदेश के जबलपुर हाई कोर्ट ने अपनी इंदौर बेंच को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करने का बुधवार को निर्देश दिया. चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कहा कि विवादित ढांचा धार जिले में स्थित है, जो इंदौर पीठ के अधिकार क्षेत्र में आता है.
बेंच ने कहा कि चूंकि संबंधित पक्ष भी उसी क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए याचिकाओं पर वहीं सुनवाई होनी चाहिए. प्रधान पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए इंदौर पीठ में 23 फरवरी की तारीख तय की है.
हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय 11वीं शताब्दी के स्मारक को कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करता है. यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है.
एएसआई के अप्रैल 2023 के आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति है.
इंदौर से सुनवाई में डिजिटल माध्यम से शामिल हुए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विनय जोशी ने बताया कि उच्च न्यायालय का यह निर्देश सभी पक्षों की सुविधा के लिए जारी किया गया है और अब यह सुनवाई इंदौर पीठ के वरिष्ठतम न्यायाधीश करेंगे.
इंदौर पीठ ने 16 फरवरी को उच्चतम न्यायालय के 22 जनवरी 2026 के आदेश का हवाला देते हुए निर्देश दिया था कि लंबित रिट याचिकाओं को तीन सप्ताह के भीतर मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष रखा जाए.
शीर्ष अदालत ने 22 जनवरी को उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि एएसआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में जमा विवादित परिसर की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और पक्षकारों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए उपलब्ध कराया जाए.
आपत्तियां दर्ज होने के बाद मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को विवादित परिसर में यथास्थिति बनाए रखने और अंतिम निर्णय तक एएसआई के अप्रैल 2023 के आदेश का पालन करने का निर्देश भी दिया.
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