MP News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतर धार्मिक जोड़े के साथ रहने को लेकर सुनाया बड़ा फैसला, लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कही ये बात
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतर धार्मिक जोड़े के साथ रहने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि दो लोगों के स्वेच्छा से लिए गए फैसले में नैतिक पुलिसिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने इस सप्ताह एक अंतर-धार्मिक जोड़े के विवाह या लिव-इन रिलेशनशिप में एक साथ रहने के अधिकार को बरकरार रखा और कहा कि दो लोगो के "स्वेच्छा से" लिये गए निर्णयों से जुड़े मुद्दे में "किसी भी नैतिक पुलिसिंग" की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
27 वर्षीय गुलजार खान द्वारा दायल की गई थी याचिका
जबलपुर में गोरखपुर निवासी 27 वर्षीय गुलजार खान द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की थी. याचिका में कहा गया था कि उसने अपनी पड़ोसी आरती साहू से 28 दिसंबर को बांद्रा की एक अदालत में शादी की थी याचिका में कहा गया है कि आरती साहू ने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया था. याचिका के अनुसार, मुंबई में रह रहे कपल को जबलपुर के पुलिसकर्मियों की एक टीम ने उस समय हिरासत में ले लिया था जब वे 15 जनवरी को बांद्रा में अपना विवाह प्रमाण पत्र लेने जा रहे थे. एमपी पुलिस उन्हें वापस जबलपुर ले गई, जिसके बाद साहू का परिवार उसे वाराणसी (यूपी) ले गया और वहां उसे अवैध रूप से हिरासत में रखा.
याचिकाकर्चा खान ने पुलिसकर्मियों पर लगाया ये आरोप
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्चा खान ने बताया कि “शादी के तुरंत बाद, हमने न केवल अपने दोनों परिवारों को सूचित करते हुए तीन पत्र भेजे, बल्कि संबंधित पुलिस स्टेशन को एक पत्र भी भेजा (उनकी शादी की सूचना देने के लिए). लेकिन फिर भी हमें जबलपुर लाया गया और रात भर मेरे साथ मारपीट की गई. अगली सुबह ही उन्होंने आरती को उसके परिवार को सौंप दिया, जबकि मुझे जाने दिया गया, लेकिन मेरे सारे दस्तावेज पुलिसकर्मियों ने ले लिए.
गोरखपुर में पुलिस अधिकारियों ने आरोप से इनकार किया
वहीं गोरखपुर में पुलिस अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया है. गोरखपुर पुलिस स्टेशन, अर्चना नगर के स्टेशन हाउस ऑफिसर ने कहा, “हमने दोनों को मुंबई से हिरासत में लिया था, लेकिन उन्हें प्रक्रिया के अनुसार उनके परिवार को सौंप दिया गया था. पुलिस उन्हें क्यों पीटेगी? वे कोई अपराधी नहीं हैं. ये आरोप गलत हैं."
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश भाजपा के नेतृत्व वाले उन कई राज्यों में शामिल है, जिन्होंने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून बनाया है. मध्य प्रदेश फ्रीडम टू रिलिजन एक्ट, 2021 जेल की सजा के साथ जबरन धर्मांतरण की सजा देता है और यह आदेश देता है कि स्वतंत्र इच्छा से धर्म परिवर्तन कराने वाले को जिला अधिकारी को सूचित करना होगा.
खान ने 18 जनवरी को उच्च न्यायालय से लगाई थी गुहार
खान ने 18 जनवरी को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. 27 वर्षीय, पेशे से मैकेनिक खान ने कहा कि “पुलिस द्वारा जिस तरह से हमारे साथ व्यवहार किया गया, उसके बाद मेरा उन पर से विश्वास उठ गया है. इसलिए मैंने न्यायपालिका से संपर्क करने का फैसला किया. ”
वहीं याचिका पर कार्रवाई करते हुए, आरती साहू (19) को न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकल पीठ के समक्ष पेश किया गया और उसने गवाही दी कि उसने स्वेच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया और खान से शादी की थी.
स्वेच्छा से लिए गए फैसले में नैतिक पुलिसिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती- कोर्ट
वहीं पुलिस की ओर से पेश वकील प्रियंका मिश्रा ने धर्मांतरण विरोधी कानून का हवाला देकर हाईकोर्ट में शादी का विरोध किया. मिश्रा ने तर्क दिया कि कानून कहता है कि कोई भी व्यक्ति शादी के उद्देश्य से धर्मांतरण नहीं कर सकता है और उन्होंने आरती साहू को नारी निकेतन भेजने के लिए अदालत से निर्देश देने के लिए कहा. वहीं न्यायमूर्ति नंदिता दुबे ने 28 जनवरी को अभियोजक के रुख के खिलाफ फैसला सुनाया और कहा, "जैसा भी हो, याचिकाकर्ता और कॉर्पस दोनों प्रमुख हैं. ऐसे मामलों में किसी भी नैतिक पुलिसिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जहां दो प्रमुख व्यक्ति एक साथ रहने के लिए तैयार हैं.
हाईकोर्ट ने साहू को नारी निकेतन भेजने की मांग खारिज की
वहीं हाईकोर्ट ने साहू को नारी निकेतन भेजने की मांग भी खारिज कर दी. न्यायमूर्ति दुबे ने सरकारी वकील और पुलिस दोनों को दंपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा, “इस अदालत के समक्ष कॉर्पस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसने याचिकाकर्ता से शादी की थी और वह उसके साथ रहना चाहती है. कॉर्पस एक प्रमुख व्यक्ति है. उसकी उम्र किसी भी पक्ष द्वारा विवादित नहीं है. संविधान इस देश के प्रत्येक प्रमुख नागरिक को अपनी या अपनी इच्छा के अनुसार अपना जीवन जीने का अधिकार देता है. ”
वहीं कोर्ट के फैसले से खुश, खान और साहू ने कहा कि वे एक नई शुरुआत के लिए जबलपुर छोड़ रहे हैंखान ने रविवार सुबह ट्रेन से जाने से पहले कहा, "मुझे बहुत पीटा गया, धमकाया गया और उसे प्रताड़ित किया गया... अब हम क्यों डरें."
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Source: IOCL
























