मध्य प्रदेश के आगर-मालवा में जिला मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय में पानी के टेंक में मरे हुए कबूतर मिलने का मामला सामने आया है. इसके बाद प्रशासन सहित जिला अस्पताल में खलबली मच गई.
जब अधिकारियो के द्वारा भी पानी के टैंक का निरीक्षण किया गया ताे उसमें मृत पक्षियो के अवशेष मिलने की पृष्टि हुई है. इस प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को नगर के रूद्राक्ष सेवा समिति के युवाओ के द्वारा जिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर अस्पताल पहुंचे. जहां सारा घटनाक्रम सामने आया.
टंकी से बदबूदार पानी सप्लाय किया जा रहा था
समिति के सदस्य शिवम टांक ने आरोप लगाया कि किसी मरीज के अटेंडर द्वारा उन्हे अस्पताल में चल रही लापरवाहियो के बारे में बताया गया और कहा कि जो पानी मरीज ओर अटेंडर को पीने के लिए मिल रहा है. वह बहुत बदबूदार है जिस टंकी से यह पानी सप्लाय किया जा रहा है. उसमें कबूतर जैसे पक्षी मरकर सड़ गए है.
इस बाद की गंभीरता को समझते हुए समिति के सदस्यो ने अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाऐं जानने का निर्णय लिया. पहुंचने पर पता चला कि जो पानी की टंकी अस्पताल के छत पर रखी है. उसमें कई कबूतर व अन्य पक्षी मरकर सड़ गए है और वहीं पानी पाईपलाईन के माध्यम से मरीजो एवं परिजन तक पीने के लिए सप्लाय किया जा रहा है.
प्रशासन ने कार्रवाई का अब तक काेई स्पष्ट जवाब नहीं दिया
समिति के सदस्यों की शिकायत पर नायब तहसीलदार ने निरीक्षण कर लापरवाही की पुष्टि की और माना कि पानी पीने लायक नहीं है. हालांकि प्रशासन ने अब तक किसी कार्रवाई का स्पष्ट जवाब नहीं दिया. अस्पताल RMO जितेंद्र कैथवाल ने टालमटोल जवाब देते हुए खुद को बचाने की कोशिश की, जबकि टंकी की सफाई पिछले एक साल से नहीं हुई.
अस्पताल में गंभीर लापरवाही के चलते मरीजों की सेहत और जान खतरे में है. सड़ी टंकी से गंदा पानी देने के अलावा, डॉक्टर समय पर नहीं आते और कई मरीजों को निजी क्लीनिक भेजा जा रहा है. जांचों के नाम पर कमीशनखोरी का आरोप भी सामने आया है. घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है.
