Chhatarpur News: केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में 'जलसत्याग्रह' खत्म, सशर्त आंदोलन वापस
Chhatarpur News In Hindi: ढोडन बांध पर 12 दिनों से चल रहा चिता आंदोलन प्रशासन के आश्वासन के बाद खत्म हुआ. किसानों ने 10 दिन की मोहलत दी है. मांगें पूरी न होने पर फिर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी.

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र में मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर चल रहा ‘ढोडन बांध पर चिता आंदोलन’ आखिरकार 12 दिन बाद समाप्त हो गया. पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ हुई अहम बैठक के बाद आदिवासी महिलाओं और किसानों ने सशर्त आंदोलन वापस लेने का फैसला लिया. केन नदी में उतरकर आदिवासी महिलाएं 'जल सत्याग्रह' कर रही थीं. उनके गोद में बच्चे, हाथों में तख्तियां और आंखों में गुस्सा दिखा.
आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी प्रमुख मांगों को गंभीरता से सुना और कई ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया है. अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि एसडीएम स्तर के अधिकारी खुद गांव-गांव जाकर सर्वे करेंगे और जिन लोगों के नाम छूट गए हैं या मुआवजे में गड़बड़ी है, उसे ठीक किया जाएगा.
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7 दिन का सर्वे, गांवों में लगेंगे कैंप
कलेक्टर पार्थ जैसवाल के मुताबिक, प्रशासन की टीमें कल से ही प्रभावित गांवों में कैंप लगाएंगी. ग्राम सभाएं आयोजित कर वास्तविक प्रभावित लोगों की पहचान की जाएगी और सूची में नाम जोड़े जाएंगे. साथ ही जिन लोगों को उचित मुआवजा नहीं मिला है, उनकी समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा.
आंदोलनकारियों की एक बड़ी मांग मुआवजा पैकेज बढ़ाने की थी. इस पर प्रशासन ने कहा है कि इस प्रस्ताव को शासन स्तर पर भेजा जाएगा. पन्ना और छतरपुर दोनों जिलों का प्रशासन मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा.
सिर्फ 10 दिन का स्थगन, फिर होगा बड़ा आंदोलन
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने साफ कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि सिर्फ 10 दिनों के लिए स्थगित किया गया है. अगर तय समय में मांगें पूरी नहीं हुईं, तो क्षेत्र में फिर से बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
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आदिवासियों ने जताया भरोसा
फिलहाल आदिवासी और किसान प्रशासन के भरोसे पर धरना खत्म करने को तैयार हुए हैं, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वे हर कदम पर नजर रखेंगे. लोगों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, जमीन पर काम दिखना चाहिए. इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है. अगले 10 दिन तय करेंगे कि मामला शांत होता है या फिर आंदोलन एक बार फिर उग्र रूप लेता है.
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Source: IOCL


























