जबलपुर: शादी के 99 दिन बाद वकील बेटी की मौत, पिता बोले- सेना में मेजर पति ने दहेज के लिए परेशान किया
Jabalpur Kavitha Death Case: शादी से पहले लड़के पक्ष ने भारी दहेज की मांग की थी. परिवार ने 100 तोला सोना, 20 लाख के हीरे के जेवर, SUV और चांदी का सामान दिया था. इसके बाद भी लड़के ने 2 करोड़ की मांग रखी.

मध्य प्रदेश के भोपाल की त्विषा शर्मा के बाद अब जबलपुर में एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है. चेन्नई निवासी पी. दक्षिणामूर्ति की 27 वर्षीय बेटी कविता की मौत उसकी शादी के 99 दिन बात हो गई. पिता ने इसे दहेज हत्या बताया है. वह पिछले एक साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं.
कविता पेशे से एडवोकेट थी और मद्रास हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करती थी. पिता का आरोप है कि शादी के बाद जम्मू कश्मीर RRC रेजिमेंट, सेना में मेजर डॉक्टर पति ने उनकी बेटी कविता को दहेज के लिए प्रताड़ित किया था. ज्यादा पैसों की मांग पूरी न होने पर उसकी हत्या कर दी गई.
खुद ससुराल छोड़कर आए थे, रात में बेटी की मौत
पी. दक्षिणामूर्ति ने बताया कि 9 जून 2025 को वह खुद अपनी बेटी को ससुराल छोड़कर आए थे. उस समय कविता पूरी तरह स्वस्थ थी. पिता के मुताबिक, वह मुस्कुरा रही थी और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थी लेकिन उसी रात करीब 9:30 बजे परिवार को सूचना मिली कि कविता बाथरूम में गिर गई है और उसे अस्पताल ले जाया गया है. आधी रात को मिली इस सूचना के बाद परिवार अगले दिन जबलपुर पहुंचा.
दक्षिणामूर्ति का कहना है कि जब उन्होंने सैन्य अस्पताल में बेटी को देखा तो वह वेंटिलेटर पर थी. उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी और आंखों में भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई दे रही थी. कुछ घंटों बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
कविता को अपमानित और मानसिक रूप से प्रमाणित किया जाता था
पिता का आरोप है कि कविता शादी के बाद लगातार मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रही थी. उन्होंने बताया कि बेटी के मोबाइल फोन में मिले मैसेज और बातचीत से पता चला कि उसे बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ता था. घर में पहले से मेड होने के बावजूद उससे बर्तन साफ करवाए जाते थे, शौचालय साफ करवाया जाता था और पूरे घर का काम कराया जाता था. पिता का कहना है कि कविता एक पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर वकील थी, लेकिन उसे जानबूझकर अपमानित करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की कोशिश की गई थी.
शादी में दिया था 100 तोला सोना, फिर भी लड़के ने मांगे दो करोड़ कैश
दक्षिणामूर्ति ने आरोप लगाया कि शादी से पहले भी लड़के पक्ष की ओर से भारी दहेज की मांग की गई थी. परिवार ने लगभग 100 तोला सोना, 20 लाख रुपये के हीरे के आभूषण, महिंद्रा एक्सयूवी कार, चांदी के सामान और घर-गृहस्थी का पूरा सामान दिया था. इसके बावजूद शादी के बाद अस्पताल निर्माण के नाम पर पहले 50 लाख रुपये और बाद में 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की गई.
पिता के अनुसार, 9 जून को जब वह बेटी को छोड़ने गए थे, तब दामाद डॉक्टर मेजर ओम नागार्जुन ने अस्पताल खोलने के लिए 2 करोड़ रुपये आर्थिक सहायता मांगी थी. उन्होंने तत्काल इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता जताई. इसके बाद लड़के पक्ष का व्यवहार बदल गया और उन्होंने बातचीत लगभग बंद कर दी.
ढाई घंटे तक कविता को अस्पताल नहीं ले गए ससुराल वाले
मृतका कविता के पिता के एडवोकेट मनीष वर्मा ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि कविता की शादी मार्च 2025 में हुई थी और विवाह के दौरान लड़के पक्ष की सभी मांगें पूरी की गई थीं. इसके बावजूद विवाह के बाद लड़की को प्रताड़ित किया गया और अतिरिक्त दहेज की मांग जारी रही. अधिवक्ता ने मर्ग जांच का हवाला देते हुए कई सवाल भी उठाए हैं. उनके मुताबिक घटना वाली रात कविता को लगभग 10 बजे घर से अस्पताल ले जाया गया था जबकि गूगल मैप के अनुसार घर से सैन्य अस्पताल की दूरी महज पांच मिनट की है. इसके बावजूद अस्पताल पहुंचने का समय रात 12:39 बजे दर्ज है. ऐसे में करीब ढाई घंटे का अंतर कई संदेह पैदा करता है.
वकील मनीष वर्मा का आरोप है कि इस दौरान कविता के साथ मारपीट की गई हो सकती है, जिसके कारण वह बेहोश हो गई. उनका यह भी दावा है कि अस्पताल में उसका इलाज गलत दिशा में किया गया और मामले को हृदय संबंधी समस्या बताने की कोशिश की गई. मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी कई सवाल खड़े कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार कविता के सिर पर दो गंभीर चोटें पाई गईं. एक चोट माथे के हिस्से में और दूसरी सिर के पिछले हिस्से में दर्ज की गई है. परिवार का कहना है कि इन चोटों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है.
पुलिस पर लगा मामले में लापरवाही का आरोप
परिजनों का आरोप है कि गोराबाजार थाना में शिकायत देने के बावजूद लंबे समय तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई. बाद में पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की गई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद परिवार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अब मामले में रिवीजन याचिका दायर की गई है. कविता के पिता का कहना है कि उन्हें आज भी संविधान और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है.
उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि दहेज एक मीठा जहर है, जो धीरे-धीरे पूरे परिवार को खत्म कर देता है. उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन वह चाहते हैं कि किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े. फिलहाल यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है और परिवार अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है.
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Source: IOCL

























