50 IAS-IPS अफसरों ने जहां खरीदी जमीन, अब वहीं से निकला बाईपास, 5 करोड़ के प्लॉट का दाम अब 65 करोड़!
Bhopal Land Scam: मामला भोपाल के कोलार इलाके के गराड़ी घाट गांव का है. एक रिपोर्ट के अनुसार, यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 50 आईएएस-आईपीएस अफसरों ने साल 2022 में एक ही दिन जमीन खरीदी थी.

- भोपाल में 50 आईएएस-आईपीएस अफसरों ने 2022 में एक ही जमीन खरीदी.
- 16 महीने बाद 3200 करोड़ का बायपास मंजूर, दाम बढ़े.
- कृषि भूमि आवासीय में बदल दी गई, 16 महीने में 11 गुना मुनाफा.
- योजनाबद्ध भ्रष्टाचार की आशंका, पूर्व में भी हुए ऐसे मामले.
मध्य प्रदेश के भोपाल जिले से जमीन खरीदने का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है. यह मामला भोपाल के कोलार इलाके के गराड़ी घाट गांव का है. एक रिपोर्ट के अनुसार, यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 50 आईएएस-आईपीएस अफसरों ने साल 2022 में एक ही दिन जमीन खरीदी थी. जमीन खरीदने के 16 महीने बाद ही वहीं से 3200 करोड़ रुपये के वेस्टर्न बायपास को मंजूरी मिलने से इसकी कीमतें कई गुना बढ़ गईं.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट का दावा है कि इन निवेशकों में न केवल मध्य प्रदेश कैडर के IAS और IPS अधिकारी शामिल थे, बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, दिल्ली और हरियाणा कैडर के अधिकारी भी शामिल थे. इस मामले की जांच हुई तो सामने आया कि 4 अप्रैल 2022 को एक ही रजिस्ट्री दस्तावेज के जरिए लगभग 2.023 हेक्टेयर (लगभग 5 एकड़) कृषि भूमि खरीदी गई थी. इस जमीन के दस्तावेज में दिखाया गया कि इसे 50 हिस्सों में खरीदा गया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 50 हिस्सों के पीछे, असल में 41 असली खरीदार ही थे.
जमीन खरीदने के 16 महीने बाद 'वेस्टर्न बायपास' प्रोजेक्ट को मंजूरी
जमीन की रजिस्ट्री उस समय 5 करोड़ 50 लाख रुपए में हुई थी, जबकि बाजार की कीमत 7 करोड़ 78 लाख रुपए थी. इस जमीन की खरीदारी के करीब 16 महीनें बाद (31 अगस्त 2023) को मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 3200 करोड़ रुपए के 'वेस्टर्न बायपास' प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी. बताया जा रहा है कि ये नया बाईपास का प्रस्तावित रास्ता, अधिकारियों द्वारा खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर ही दूर है. इसके बाद जो जमीन कृषि भूमि के तौर पर वर्गीकृत थी, उसे बदलकर आवासीय कर दिया गया. ये काम बाईपास प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के लगभग 10 महीने बाद यानि कि जून 2024 को इसे आधिकारिक तौर पर कृषि से बदलकर आवासीय कर दिया गया.
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16 महीने में निवेशकों को 11 गुना तक का फायदा
जो जमीन 2022 में लगभग 82 रुपये प्रति वर्ग फुट की अनुमानित दर पर खरीदी गई थी, वो आवासीय होने के बाद लगभग 557 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई. इसकी कुल कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये हो गई. रिपोर्ट में दिए गए मौजूदा बाजार के अनुमानों के मुताबिक, इस इलाके में जमीन की कीमतें अब 2,500 रुपये से 3,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच हैं, जिससे इसी जमीन की कुल अनुमानित कीमत बढ़कर लगभग 55 करोड़ रुपये से 65 करोड़ रुपये हो गई है. इसका मतलब है कि आईएएस-आईपीएस अफसरों को 16 महीने में 11 गुना तक का फायदा हो गया. हालांकि, जांच में यह भी सामने आया है कि प्रस्तावित विकास परियोजना के लिए अभी तक कोई हाउसिंग सोसाइटी रजिस्टर्ड नहीं हुई है. नियम कहते हैं कि आवासीय विकास का काम तभी आगे बढ़ सकता है, जब जमीन किसी रजिस्टर्ड हाउसिंग सोसाइटी को ट्रांसफर कर दी जाए या प्लॉट औपचारिक रूप से आवंटित कर दिए जाएं.
पहले भी कई योजनाओं में हुई है गड़बड़ी
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन अफसरों को पहले से जानकारी थी कि गराड़ी घाट गांव में बायपास का प्रोजेक्ट पास होने वाला है? क्या इसी जानकारी के बाद इन अधिकारियों ने योजना के तहत जमीन खरीदी और स्थानीय जनता के हक के पैसे छीन लिए? क्या ये सुनियोजित भ्रष्टाचार नहीं है? हालांकि, ये कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं. इससे पहले दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे परियोजना में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था. यहां के अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर किसानों से सस्ती जमीन खरीदी दी. बाद में इन अधिकारियों पर सरकार को कई गुना कीमत पर जमीन बेचने के आरोप लगे थे. भारतमाला परियोजना के दौरान छत्तीसगढ़ में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था. ऐसे में सवाल सिस्टम की पारदर्शिता पर तो उठते ही हैं.
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