मध्य प्रदेश के गुना में दूषित पानी पीने से करीब 10 बच्चे बीमार हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और पानी के सैंपल इकट्ठे किए गए हैं. जल जीवन मिशन के चीफ ऑफिसर संचित ढेमरी ने बताया कि वार्ड नंबर 9 और 10 से बच्चों के बीमार होने की सूचना प्राप्त हुई थी, जिसके बाद टीम को मौके पर भेजकर सैंपलिंग कराई गई है.
संचित ढेमरी ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर लिए गए पानी के सैंपल साफ और बिना किसी बदबू के पाए गए हैं, फिर भी विस्तृत जांच के लिए उन्हें पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE) लैब भेजा गया है. उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित जल टैंक से लगभग छह वार्डों में तक पानी पहुंचता है, लेकिन फिलहाल केवल वार्ड नंबर 9 और 10 से बच्चों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है. कल सुबह (9 जून) पानी की सप्लाई शुरू होने के बाद दोबारा सैंपलिंग की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी में किसी प्रकार का कंटैमिनेशन है या नहीं.
जल जीवन मिशन की टीम के अनुसार पानी पीने अभी तक ठीक पाया गया है और उसमें किसी प्रकार की बदबू या अन्य समस्या नहीं पाई गई है, फिर भी एहतियात के तौर पर दोबारा जांच कराई जाएगी. जांच रिपोर्ट एक से दो दिनों में आने की संभावना है.
10 बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती, उल्टी, दस्त और पीलिया जैसे लक्षण
वहीं, जिला अस्पताल के अधिकारी डॉ. पीएन धाकड़ ने बताया कि कुछ बच्चों को उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल ठीक है और कोई भी मामला गंभीर नहीं है. बच्चों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द तथा कुछ मामलों में पीलिया जैसे लक्षण पाए गए हैं. प्राथमिक जांच में कुछ बच्चों के लिवर में सूजन और पीलिया की शिकायत सामने आई है, जिसका कारण दूषित खान-पान माना जा रहा है.
हालांकि अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि बच्चों की बीमारी का कारण दूषित पानी ही है, लेकिन प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और पानी की गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए गए हैं. अस्पताल में लगभग 10 बच्चों को भर्ती कराया गया है, जिनकी उम्र 5 से 11 साल के बीच बताई जा रही है.
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