मध्य प्रदेश के दतिया जिले से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को कोआपरेटिव बैंक घोटाला मामले में दोषी करार दिया गया. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने राजेंद्र भारती को 50 हजार के बॉन्ड पर जमानत दे दी. हालांकि, अभी यह नहीं कहा जा सकता कि उनकी विधायकी पर संकट आएगा या नहीं. दरअसल, नियम यही कहता है कि अगर किसी विधायक को दो साल से ज्यादा की सजा होती है, तो उसकी विधायकी अपने आप चली जाएगी. अब यह देखना होगा कि दतिया विधायक के साथ क्या होता है. 

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दोषी ठहराए जाने के बाद कोर्ट ने राजेंद्र भारती को जेल भेज दिया था. फिलहाल, राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजेंद्र भारती को हाई कोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए 30 दिन का समय दिया है. इस मामले में सह आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी तीन साल की सजा सुनाई गई और फिर जमानत दी है. 

विधायक ने ग्वालियर की जगह दिल्ली शिफ्ट कराया केस

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फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था कि विधायक राजेंद्र भारती को IPC की धारा 120B के साथ IPC की धारा 420/467/468/471 के तहत क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी के जुर्म का दोषी ठहराया जाता है. राजेंद्र भारती ने ही अपने मुकदमे को ग्वालियर के एमपी/एमएलए कोर्ट से दिल्ली ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. 

नरोत्तम मिश्रा पर लगाए थे दबाव के आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने राजेंद्र भारती की अर्जी स्वीकारते हुए मुकदमे को दिल्ली के राउज एवेन्यू की एमपी/एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था. दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने सुप्रीम कोर्ट में एमपी बीजेपी के नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके परिवार के लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया था कि उनके केस को राजनीतिक दबाव के चलते प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी. 

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का आरोप था कि अभियोजन अधिकारी भी पूर्व मंत्री के दबाव में काम कर रहे हैं. इसलिए इस मामले की सुनवाई ग्वालियर की जगह किसी और जगह से की जानी चाहिए.