मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव की मतगणना पूरी हो गई है और यहां कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6000 से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी. कांग्रेस ने दतिया में यह लगातार दूसरी जीत दर्ज की है. 

Continues below advertisement

इस हार के बाद बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की प्रतिक्रिया सामने आई है. आशुतोष तिवारी ने इस हार को स्वीकार करते हुए कहा, "इस हार और जीत की दृष्टि से मत देखिए ये जनादेश है." उन्होंने आगे कहा, "जनादेश हमेशा हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर स्वीकार किया जाता है."

दतिया: नतीजों पर CM मोहन यादव की पहली प्रतिक्रिया, 'BJP के...'

Continues below advertisement

भीतरघात को लेकर क्या बोले आशुतोष तिवारी?

भीतरघात को लेकर कहा, "कांग्रेस के बड़े नेता का बयान आया है और जैसे परिणाम आए हैं. उनके आधार पर यह कहा जा सकता है पर यह अनहोनी जैसी बात नहीं है. ऐसा नहीं कि मैं अनभिज्ञ हूं या अनजान था." आशुतोष ने कहा, "इस प्रकार की राजनीति मैं करना नहीं चाहता. थोड़ा सा समझता हूं और जितना समझता हूं और उतना समझने का प्रयास करूंगा."

भीतरघात करने वाले की आलाकमान से शिकायत पर उन्होंने कहा, "शिकायत जैसा व्यवहार मेरा रहा नहीं है लेकिन नेृत्तव अपने आप ही संज्ञान लेगा क्योंकि बहुत सारी बातें छिपी हुई नहीं रहती हैं. जिन्होंने भी पाप किया सामने आ जाएगा."

नरोत्तम मिश्रा का नाम लिए बिना उन्होंने निशाना साधा है. उन्होंने यह भी कहा, "विधायक, सांसद बनना आशुतोष के जीवन में कभी मायने नहीं रखता था. मैंने 32 साल सार्वजनिक जीवन के दिए हैं. एमएलए-एमपी बनने का शौक नहीं है."

जनादेश को स्वीकार करता हूं- आशुतोष तिवारी

आशुतोष तिवारी ने कहा, "मैं भी हाथ जोड़ता हूं. सिर झुकाता हू्ं और जनादेश को स्वीकार करता हूं." उन्होंने आगे कहा, "संकल्प लेता हूं और लिया भी था उसे दोहरा रहा हूं. जनता से मिले लाड़-प्यार के लिए अपने जीवन की अंतिम सांस समर्पित करता हूं. आखिरी सांस तक इन सबको सेवा के साथ उपस्थिति दर्ज कराता रहूंगा."

एनडीवी से बात करते हुए पार्टी में गुटबाजी और भीतरघात के सवाल पर बीजेपी नेता ने कहा, "इसकी समीक्षा में जब बात होगी तो ध्यान में आएगा. मुझे लगता है कि इतनी जल्दी प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए." नरोत्तम मिश्रा के सवाल पर कहा, "अगर बातें संज्ञान में आएंगी तो मैं अधिकृत बातें करूंगा. क्योंकि अब जीना यहां, मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां."

दतिया: जमानत नहीं बचा पाए 19 उम्मीदवार, कइयों को 500 वोट भी नहीं