इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई लोगों की मौत को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने शहरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने इसे शहरी नियोजन की बड़ी और घातक विफलता बताया है. दिग्विजय सिंह का कहना है कि जब तक सीवेज और पीने के पानी की लाइनें पूरी तरह अलग नहीं की जाएंगी, तब तक इस तरह की घटनाएं बार-बार होती रहेंगी.
हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण डायरिया फैल गया था. इस बीमारी की चपेट में आकर कई लोगों की जान चली गई. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक छह लोगों की मौत हुई है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या 17 से अधिक है. प्रशासन की ओर से 18 पीड़ित परिवारों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है.
स्वच्छ जल व्यवस्था में कैसे घुस गया भ्रष्टाचार- दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने एक समाचार पत्र में लिखे एक आलेख में कहा कि जिन लोगों की जान गई है, उन्हें कोई मुआवजा वापस नहीं ला सकता और न ही इससे परिवारों का दर्द कम हो सकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर लापरवाही और भ्रष्टाचार कैसे स्वच्छ जल व्यवस्था में घुस गया. उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि देश का लगभग 70 प्रतिशत पानी दूषित हो चुका है. सिंह ने कहा कि अगर कई बार देश का सबसे स्वच्छ शहर चुने गए इंदौर में ऐसा हो सकता है, तो दूर-दराज और गरीब इलाकों में हालात और भी खराब होंगे.
हर दस साल में नया मास्टर प्लान बनाना जरूरी- दिग्विजय
दिग्विजय सिंह ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, पलायन और घटते रोजगार के कारण स्वच्छ पेयजल एक बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने सुझाव दिया कि अवैध बस्तियों पर नियंत्रण, सीवेज और पानी की अलग-अलग लाइनें तथा हर दस साल में नया मास्टर प्लान बनाना जरूरी है. उन्होंने इसे केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिक कर्तव्य बताया.
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