Bhopal News: भोपाल से उड़ा गिद्ध 6 दिनों में पहुंचा पाकिस्तान, दोनों देशों की टीमों ने मिलकर किया रेस्क्यू
Bhopal News In Hindi: भोपाल से उड़ान भरने वाला गिद्ध महज 6 दिनों में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गया. भारत और पाकिस्तान की WWF टीमों ने मिलकर इसे सुरक्षित रेस्क्यू किया है.

पक्षियों और वन्यजीवों के लिए सरहदें कोई मायने नहीं रखतीं, इस बात को सच साबित करते हुए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उड़ान भरने वाला एक गिद्ध महज छह दिनों में भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गया. इस हैरतअंगेज सफर ने जहां एक तरफ वन्यजीव विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है, वहीं दूसरी ओर भारत और पाकिस्तान के बीच वन्यजीव संरक्षण के लिए आपसी सहयोग की एक बेहतरीन मिसाल भी पेश की है.
हलाली डैम से शुरू हुआ था सफर
जानकारी के मुताबिक, इस गिद्ध को हाल ही में भोपाल के पास स्थित हलाली डैम क्षेत्र से ट्रैकिंग डिवाइस (जीपीएस टैग) लगाकर खुले आसमान में छोड़ा गया था. छोड़ने के बाद से ही वन विभाग की टीम इसकी उड़ान की लगातार निगरानी कर रही थी. शुरुआती दिनों में इसकी मूवमेंट बिल्कुल सामान्य रही, लेकिन जल्द ही इसने अपनी दिशा बदली और राजस्थान की तरफ बढ़ने लगा. ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए लगातार आगे बढ़ रहे इस गिद्ध की लोकेशन अचानक पाकिस्तान की सीमा के भीतर दर्ज की गई.
खानेवाल में टूटा सिग्नल, अलर्ट हुई टीम
ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह गिद्ध राजस्थान के रास्ते उड़ान भरते हुए पाकिस्तान के खानेवाल क्षेत्र में पहुंचा था. लेकिन वहां पहुंचने के कुछ समय बाद ही उसके डिवाइस का सिग्नल अचानक बंद हो गया. सिग्नल गायब होते ही भारत का वन विभाग और वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फेडरेशन (WWF) की टीम तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई. भारत की WWF शाखा ने बिना समय गंवाए पाकिस्तान की WWF टीम और वहां के वन विभाग से संपर्क साधा और गिद्ध की जानकारी साझा की.
सरहद पार ऐसे बचाई गई जान
दोनों देशों की टीमों के बीच हुए इस शानदार समन्वय के बाद, पाकिस्तान में स्थानीय स्तर पर गिद्ध की तलाश शुरू की गई. आखिरकार, स्थानीय लोगों की मदद से इस गिद्ध को पाकिस्तान के खानेवाल इलाके से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया. इतनी लंबी दूरी तय करने के कारण गिद्ध को संभावित थकान और चोट का सामना करना पड़ा था.
रेस्क्यू सेंटर में चल रहा इलाज
रेस्क्यू के बाद फिलहाल इस गिद्ध को पाकिस्तान के एक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है, जहां विशेषज्ञ उसका इलाज और देखभाल कर रहे हैं. भोपाल से छोड़े गए इस गिद्ध का पाकिस्तान पहुंचना वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों में एक असामान्य लेकिन बेहद महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है. इस घटना ने साबित कर दिया है कि दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग कितना जरूरी है.
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Source: IOCL




























