खाड़ी देशों में जारी युद्ध और अशांति के कारण देश में एलपीजी (LPG) का संकट गहराने लगा है. पिछले एक महीने के भीतर कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में दो बार भारी बढ़ोतरी हो चुकी है. इसका सीधा असर अब आम आदमी की जेब और खाने-पीने की चीजों पर पड़ रहा है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में फास्ट फूड से लेकर सामान्य भोजनालयों की थाली तक सब कुछ महंगा हो गया है.
भोपाल के मशहूर 'सागर गैरे' रेस्टोरेंट सहित कई फूड आउटलेट्स पर खाने-पीने के दाम बढ़ा दिए गए हैं. सैंडविच, पास्ता से लेकर सूप तक, मेन्यू में शामिल लगभग हर आइटम पर 10 से 20 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. रेस्टोरेंट संचालकों का स्पष्ट कहना है कि एक ही महीने में कमर्शियल सिलेंडर के दामों में दो बार हुए इजाफे के कारण उनके पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था.
आम आदमी की 'थाली' भी हुई 30 रुपये तक महंगी
महंगाई की यह आंच सिर्फ फास्ट फूड तक सीमित नहीं है. दोपहर का सस्ता और भरपेट भोजन परोसने वाले भोजनालयों में भी खाना अब महंगा हो गया है. भोपाल के 'शंकर भोजनालय' में खाने की थाली के दामों में 20 से 30 रुपये तक का सीधा इजाफा किया गया है.
जो साधारण थाली पहले 160 रुपये में मिलती थी, वह अब 180 रुपये की हो गई है. जो स्पेशल थाली पहले 180 रुपये की थी, उसके दाम बढ़ाकर 210 रुपये कर दिए गए हैं. इसके अलावा दाल, सब्जी सहित मेन्यू के अन्य सभी आइटम्स के रेट भी बढ़ गए हैं.
ब्लैक में मिल रहे सिलेंडर, आगे और बढ़ सकते हैं दाम
भोजनालय और रेस्टोरेंट संचालकों की परेशानी सिर्फ बढ़ी हुई कीमतें नहीं हैं, बल्कि सिलेंडरों की किल्लत भी एक बड़ा मुद्दा है. संचालकों के मुताबिक, बाजार में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति सुचारू नहीं है. इस कारण कई बार उन्हें मजबूरी में ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं. उनका कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले दिनों में खाने के दाम और भी बढ़ाए जा सकते हैं.
जनता ने समझी संचालकों की मजबूरी
महंगाई की इस मार से आम उपभोक्ता परेशान जरूर हैं, लेकिन वे रेस्टोरेंट और भोजनालय संचालकों की मजबूरी को भी भली-भांति समझ रहे हैं. उपभोक्ताओं का कहना है कि जब सरकार की तरफ से ही कमर्शियल गैस महंगी मिल रही है, तो दुकानदार भी अपनी जेब से नुकसान सहकर कब तक सस्ता खाना खिलाएंगे.
