भोपाल में APCR सम्मेलन, शहर काजी मुफ्ती मुश्ताक नदवी बोले- 'न्याय पाने के लिए सभी को एकजुट...'
Bhopal News In Hindi: भोपाल में APCR के सफल राज्य सम्मेलन में न्याय, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों पर गहन चर्चा हुई. काज़ी-ए-शहर मुफ्ती मुश्ताक ने अन्याय के खिलाफ एकजुट लड़ाई का आह्वान किया.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) की प्रांतीय इकाई द्वारा एक सफल राज्य सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण काज़ी-ए-शहर भोपाल मुफ्ती मुश्ताक नदवी का संबोधन रहा. समारोह को संबोधित करते हुए मुफ्ती मुश्ताक नदवी ने जोर देकर कहा कि न्याय पाने के लिए सभी को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि न्याय की इस लड़ाई के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि देशवासियों को इस्लाम धर्म के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराया जाए. इसी कड़ी में उप क़ाज़ी-ए-शहर मुफ्ती अल क़दर ने भी अपने संबोधन में न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया.
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए वकील, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और वंचित समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नागरिक अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों, कानूनी जागरूकता और समाज में बढ़ती नफरत, भेदभाव व तानाशाही प्रवृत्तियों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना था.
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'अदालतों से बाहर समाज में भी लड़नी होगी लड़ाई'
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने भी शिरकत की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए केवल अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ना काफी नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता की सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है. शिक्षाविद और लेखक प्रोफेसर अपूर्वानंद झा ने समाज में बढ़ती नफरत और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय की लड़ाई को समाज के भीतर भी मजबूत करना होगा.
नफरत फैलाने वालों के खिलाफ सामूहिक संघर्ष की अपील
इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (IMCR) के चेयरमैन और पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए सभी विपक्षी और लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होने का आह्वान किया.
पूर्व डीजीपी वज़ीर अहमद अंसारी ने एमपी में अल्पसंख्यकों और SC/ST समुदायों की स्थिति पर चिंता जताते हुए हाई कोर्ट बेंच की कमी, मांस परिवहन और धर्मांतरण विरोधी कानूनों के दुरुपयोग पर सवाल उठाए.
APCR के महासचिव मलिक मोतसिम खान ने उन सरकारों की भूमिका पर कड़े सवाल खड़े किए जो आम लोगों की जमीन, रोज़गार और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही हैं.
APCR की ग्राउंड रिपोर्ट और कानूनी संघर्ष
सम्मेलन में APCR के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान ने संगठन की राष्ट्रीय रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि अन्याय का शिकार कोई भी व्यक्ति अकेला नहीं है, न्याय के लिए सामूहिक कानूनी संघर्ष जरूरी है. एडवोकेट अशरफ अली ने मध्य प्रदेश में APCR के हालिया कार्यों का उल्लेख किया. वरिष्ठ अधिवक्ता रेखा श्रीवास्तव ने संगठन के कार्यों की सराहना करते हुए अपना पूर्ण समर्थन देने की बात कही.
खंडवा के काज़ी अशफाक अली ने 'टिटगांव मामले' का विशेष रूप से जिक्र किया, जहां APCR के कानूनी हस्तक्षेप से मकान हटाने की कार्रवाई में बड़ी राहत मिली थी.
कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय युवा वकीलों और कवियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई. जावेद अख्तर ने स्वागत भाषण दिया, जबकि मंच संचालन अधिवक्ता फव्वाज शाहीन ने किया. आयोजन को सफल बनाने में ज़ैद पठान, डॉ. फ़ज़ल, अनवर पठान और एडवोकेट ज़ुबैर इलाही सहित उनकी टीम का विशेष योगदान रहा.

























