बड़वानी: मिडिल ईस्ट तनाव से केले का निर्यात ठप, ₹25 का केला ₹8 में बेचने को मजबूर किसान
Barwani Banana Export Crisis: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले का केला भू-राजनीतिक संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय निर्यात में भारी गिरावट का सामना कर रहा है. केले का निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है.

अपनी विशेष मिठास और गुणवत्ता के लिए दुनियाभर में मशहूर मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले का केला इन दिनों ईरान-इजरायल संकट का शिकार हो गया है. खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के कारण बड़वानी से होने वाला केले का निर्यात पूरी तरह से ठप पड़ गया है. रमजान के इस महीने में जहां केले की मांग और दाम अपने चरम पर होते हैं, वहीं इस बार विदेशी सप्लाई चेन टूटने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
नर्मदा नदी के किनारे बसे होने के कारण बड़वानी जिले की मिट्टी बेहद उपजाऊ है और यहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता है. यही भौगोलिक परिस्थितियां यहां के केले को एक खास स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता प्रदान करती हैं. हर साल यहां से हजारों टन केला खाड़ी और मिडिल ईस्ट के देशों में निर्यात किया जाता है. इन केलों के प्रमुख विदेशी खरीदारों में ईरान, इराक, इजरायल, बहरीन, तुर्की और दुबई (यूएई) जैसे देश शामिल हैं.
25 रुपये से सीधे 8-9 रुपये पर आई कीमतें
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों ने स्थानीय किसानों की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है. रमजान के वक्त अमूमन बाजार में केले की भारी मांग रहती है, लेकिन इस बार विदेशी खरीदार न होने से बाजार में भारी सुस्ती है. युद्ध के तनाव से पहले तक किसानों को अपनी फसल का दाम लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल रहा था. निर्यात रुकने से अब यह भाव औंधे मुंह गिरकर महज 8 से 9 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. खेतों में फसल पूरी तरह से पककर तैयार है, लेकिन सही खरीदार न मिलने से किसानों को मजबूरी में भारी घाटा सहकर अपना माल बेचना पड़ रहा है.
घरेलू मंडियों में ओवरसप्लाई से बिगड़ा खेल
व्यापारियों का कहना है कि हर साल बड़वानी से जो केला सीधा विदेश जाता था, उसके निर्यात पर अब पूरी तरह ब्रेक लग गया है. इस कारण ट्रकों का रुख अब देश की घरेलू मंडियों की तरफ मुड़ गया है. विदेशी खेप को अब मजबूरी में दिल्ली, ग्वालियर और देश के अन्य बड़े शहरों की मंडियों में भेजा जा रहा है. इन घरेलू मंडियों में अचानक आवक (Oversupply) बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण वहां भी भाव गिर गए हैं और किसानों को सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं.
केले की नकदी फसल पर पूरी तरह निर्भर बड़वानी के हजारों किसानों के लिए यह समय एक बड़े आर्थिक संकट का है. पूरा किसान और व्यापारी वर्ग अब इसी उम्मीद में है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात जल्द सामान्य हों, ताकि उनका व्यापार एक बार फिर से पटरी पर लौट सके.
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