AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने वाले आरोपी को मिली जमानत
Neha Bora News: झारखंड विधानसभा तक विरोध मार्च के दौरान आरोपी अमरनाथ पांडेय ने 7 अगस्त को नेहा बोरा पर स्याही फेंकी थी, जिसके तत्काल बाद उसे हिरासत में ले लिया गया था.

रांची के एक सिविल कोर्ट ने चार दिन पहले झारखंड विधानसभा तक विरोध मार्च के दौरान ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने के आरोपी एक व्यक्ति को मंगलवार (11 अगस्त) को जमानत दे दी. आरोपी अमरनाथ पांडेय ने शुक्रवार (07 अगस्त ) को बोरा पर स्याही फेंकी थी, जिसके तत्काल बाद उसे हिरासत में ले लिया गया था. बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था.
10-10 हजार रुपये के दो बॉण्ड भरने के बाद मिली जमानत
आरोपी के वकील गौरव शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘‘अदालत ने 10-10 हज़ार रुपये के दो जमानती बॉण्ड भरने पर पांडेय को जमानत दे दी. जमानत इस शर्त पर दी गई कि आरोपी बोरा के खिलाफ किसी भी मंच पर कोई बयान नहीं देगा.’’
पांडेय के खिलाफ BNS की धाराओं तहत हुआ था मामला दर्ज
प्रदेश आइसा सचिव संतोष कुमार उर्फ त्रिलोकीनाथ के बयान के आधार पर पांडेय के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. पांडेय ने सात अगस्त को बिरसा चौक के पास बोरा पर स्याही फेंकी थी. तब आइसा, एआईएसएफ और अन्य छात्र संगठनों के समर्थक राज्य में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे.
7 अगस्त को मार्च के दौरान नेहा बोरा पर फेंकी गई थी स्याही
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और सुधारों की मांग को लेकर वाम छात्र संगठनों की ओर से 7 अगस्त को निकाले गए मार्च के दौरान नेहा बोरा पर स्याही फेंकने के बाद अफरा-तफरी मच गई थी. घटना के बाद नेहा बोरा ने सोशल मीडिया के जरिए नेहा ने कहा था कि वे पहले भी पुलिस लाठीचार्ज और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों का सामना कर चुकी हैं, इसलिए ऐसी ओछी हरकतों से उनके हौसले और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई को कमजोर नहीं किया जा सकता.
पांडेय ने नेहा बोरा को लेकर क्या कहा था?
उसी दिन बाद में, पांडेय ने कहा था कि वह उन्हें पसंद नहीं करते, क्योंकि वह 'उमर खालिद की समर्थक और देश-विरोधी' हैं. उमर खालिद को सितंबर 2020 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया गया था. खालिद पर आरोप है कि वह फरवरी 2020 के दंगों के मुख्य षड्यंत्रकारियों में से एक है. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.
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