झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है. प्रदर्शनकारियों में शामिल एक छात्र नेता ने गुरुवार (7 अगस्त) को यह दावा किया. कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) नीत गठबंधन का एक घटक दल है. छात्र नेता रविंद्र पासवान ने दावा किया कि गुरुवार शाम टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों का विवरण भेजने को कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे.

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प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराई जाए. उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधारों पर भी जोर दिया. 

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छात्र नेता ने राहुल गांधी से की क्या बात?

6 प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर हैं. छात्र-नेतृत्व वाले इस प्रदर्शन को आज 14 दिन हो रहे हैं. पासवान ने संवाददाताओं से कहा, 'मेरी राहुल गांधी से बातचीत हुई. मैंने उन्हें यहां की स्थिति से अवगत कराया, खासतौर पर यह बताया कि परीक्षा माफिया किस तरह फल-फूल रहा है. मैंने उनसे कहा कि चूंकि उनकी पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है, इसलिए उन्हें इस मामले में कांग्रेस का रुख स्पष्ट करना चाहिए.' 

BJP ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

राहुल गांधी की टेलीफोन पर हुई बातचीत पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता केवल 'इससे राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहते थे.' प्रवक्ता ने कहा, ‘‘क्या वे वास्तव में समाधान चाहते हैं? यहां उनकी गठबंधन सरकार है, जिसमें उनके चार मंत्री तक हैं, लेकिन उनमें से एक भी प्रदर्शन स्थल पर नहीं आया. उनकी पार्टी के प्रभारी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता के. राजू ने प्रदर्शन स्थल से महज एक किलोमीटर दूर स्थित मुख्यमंत्री आवास का दौरा किया, लेकिन उन्होंने छात्रों से मिलना तक जरूरी नहीं समझा.’’ 

झारखंड के बड़े छात्र आंदोलनों में से एक

आंदोलन कर रहे छात्रों और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने हेतु 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया. जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के बैनर तले शुरू हुआ यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में राज्य के सबसे बड़े छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलनों में से एक बनकर उभरा है.

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