छात्र आंदोलन को लेकर रांची में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित वार्ता से पहले छात्रों ने रणनीतिक बैठक की. इस बैठक में बातचीत की तैयारी, प्रतिनिधिमंडल की संख्या और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं.
छात्रों की तरफ से सरकार को प्रस्ताव दिया जा रहा है कि हम 10 लोग बातचीत के लिए आना चाहते हैं. वहीं सरकारी पक्ष की ओर से 5 लोगों के प्रतिनिधिमंडल का प्रस्ताव रखा गया है. अगर 10 प्रतिनिधियों पर सहमति नहीं बनती है तो छात्र 5 लोगों के साथ ही वार्ता में शामिल होंगे.
दो पत्रकार और एक वकील भी साथ ले जाने की तैयारी
रणनीतिक बैठक में यह भी तय किया गया कि छात्र अपने साथ दो पत्रकार और एक वकील को लेकर जाएंगे. इसका उद्देश्य यह है कि प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर उन पर किसी तरह का दबाव न बनाया जा सके और बातचीत के दौरान अलग-अलग बिंदुओं में उन्हें फंसाने की कोशिश न हो.
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'100 प्रतिशत मांगें मानी जाएं, नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा'
बैठक में यह स्पष्ट फैसला भी हुआ कि अगर छात्रों की शत-प्रतिशत मांगें मानी जाती हैं तो ठीक है, अन्यथा आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा. यानी वार्ता का परिणाम छात्रों की सभी मांगों पर निर्भर करेगा.
वार्ता से पहले होगा रिहर्सल
बैठक में यह भी तय हुआ कि सरकार से बातचीत के लिए जाने से पहले छात्रों का एक रिहर्सल कराया जाएगा. इसमें कुछ छात्र मंत्री और सरकारी अधिकारियों की भूमिका निभाएंगे, जबकि वार्ता में शामिल होने वाले छात्र उनके सामने बैठेंगे.
इस दौरान मंत्री और अधिकारियों की भूमिका निभाने वाले छात्र कड़े सवाल पूछेंगे और बैठक में बनने वाली संभावित असहज परिस्थितियों को भी तैयार किया जाएगा, ताकि वास्तविक वार्ता के दौरान छात्र हर स्थिति का बेहतर तरीके से सामना कर सकें.
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प्रतिनिधियों के नामों पर बनी सहमति
बैठक में वार्ता के लिए भेजे जाने वाले छात्रों के नामों पर भी सहमति बन गई है. हालांकि अगर सरकार 10 प्रतिनिधियों पर सहमत नहीं होती है और 5 लोगों के प्रस्ताव पर ही बात बनती है, तो प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ नाम बदले जा सकते हैं. फिलहाल छात्र अंतिम रणनीति के साथ सरकार से होने वाली प्रस्तावित वार्ता की तैयारी में जुटे हुए हैं.
