झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद इंडिया (इंडी) गठबंधन के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है. कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और भाकपा (माले) पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाया है. वहीं दोनों दलों ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है. इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
दो सीटों पर हुआ चुनाव, कांग्रेस उम्मीदवार हारे
राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में जेएमएम के बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी ने जीत दर्ज की. दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा.
खास बात यह है कि विधानसभा में संख्याबल इंडिया गठबंधन के पक्ष में माना जा रहा था. ऐसे में कांग्रेस की हार ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है.
नतीजे आने के बाद झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि हमारे प्रत्याशी को कांग्रेस और जेएमएम के अपेक्षित वोट मिले, लेकिन आरजेडी और भाकपा (माले) की ओर से समर्थन नहीं मिला. उन्होंने इन दोनों सहयोगी दलों के कुछ विधायकों पर एनडीए समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग का आरोप लगाया.
कांग्रेस विधायक और मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी सहयोगी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि महागठबंधन के घटक दलों को स्पष्ट करना चाहिए कि मतदान के दौरान उनका रुख क्या था?
सभी विधायकों ने गठबंधन उम्मीदवार को दिया वोट- आरजेडी
कांग्रेस के आरोपों के बाद आरजेडी ने तुरंत जवाब दिया. आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार इंडी गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया.
उन्होंने दावा किया कि मतदान के दौरान वे स्वयं अधिकृत एजेंट के रूप में मौजूद थे और विधायकों ने उन्हें वोट दिखाकर मतदान किया था. उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को तथ्यहीन और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया.
आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री संजय यादव ने कहा कि आरजेडी हमेशा गठबंधन धर्म का पालन करने वाली पार्टी रही है. कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने संगठन और विधायकों के बीच स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए.
वहीं आरजेडी विधायक सुरेश पासवान ने कहा कि पार्टी अपनी राजनीतिक विफलता का ठीकरा सहयोगी दलों पर फोड़ने का प्रयास कर रही है. उन्होंने दावा किया कि आरजेडी के चारों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया.
माले ने भी कांग्रेस को घेरा
भाकपा (माले) ने भी कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. पार्टी के झारखंड राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि माले के दोनों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को ही वोट दिया. उन्होंने बताया कि मतदान के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद थे और उन्होंने वोटिंग प्रक्रिया का सत्यापन किया था.
भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी कहा कि कांग्रेस अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए सहयोगी दलों पर आरोप लगा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना प्रमाण सहयोगियों पर आरोप लगाने से इंडी गठबंधन की एकजुटता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है.
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने महागठबंधन के भीतर मौजूद अंतर्विरोधों को सार्वजनिक कर दिया है. कांग्रेस जहां क्रॉस वोटिंग के लिए सहयोगी दलों को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं आरजेडी और माले का दावा है कि कांग्रेस अपने ही विधायकों का पूरा समर्थन जुटाने में विफल रही.
ऐसे में राज्यसभा चुनाव का यह नतीजा अब सिर्फ चुनावी हार-जीत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि गठबंधन की अंदरूनी राजनीति पर भी नई बहस छेड़ गया है.
